बिहार में हाल के विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद किशोर ने खुलासा किया कि चुनाव नहीं लड़ने का उनका फैसला शायद उनकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई। उन्होंने कहा कि पार्टी को संतोषजनक परिणाम पाने के लिए अभी बहुत मेहनत करनी होगी। किशोर ने स्वीकार किया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनकी पार्टी को विधानसभा चुनावों में 4 प्रतिशत से भी कम वोट मिलेंगे।
चुनाव परिणामों के बाद किशोर ने स्पष्ट किया कि वह बिहार में अपनी चुनावी सफलता पाने तक काम करना जारी रखेंगे। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह सफलता उन्हें हासिल करने में कितना समय लगेगा। उन्होंने अपनी पार्टी और समर्थकों से भी अपील की कि निराशा में न पड़ें और लगातार मेहनत जारी रखें।
इस अवसर पर किशोर ने एक बार फिर अपने आरोप दोहराए कि सत्ता में मौजूद जनता दल (यूनाइटेड) ने चुनाव से ठीक पहले नकद लाभ वितरण और बड़े वित्तीय वादों के जरिए असमान लाभ उठाया। उनका कहना था कि इस रणनीति ने मतदाताओं के फैसले पर गहरा प्रभाव डाला और चुनाव के निष्पक्ष होने की संभावना को प्रभावित किया।
किशोर ने पत्रकारों से कहा, ‘मैं बिहार में जीत हासिल किए बिना पीछे नहीं हटूंगा। मुझे नहीं पता कि इसमें कितना समय लगेगा, लेकिन मैं लगातार मेहनत करता रहूंगा।’ उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में धैर्य और निरंतर प्रयास ही सफलता की कुंजी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि किशोर की यह प्रतिक्रिया उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने चुनाव में मिले कमजोर प्रदर्शन को केवल असफलता के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे भविष्य की रणनीति बनाने का अवसर माना। बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में अब देखना यह है कि किशोर अपनी मेहनत और रणनीति से अगले चुनावों में कितना असर डाल पाते हैं।
किशोर की यह स्पष्ट राय उनके समर्थकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। उनका मानना है कि चुनावी जीत केवल समय और सही रणनीति का परिणाम होती है, और वह इसे हासिल करने तक पीछे नहीं हटेंगे।