बिहार में विधानसभा चुनाव के बाद एनडीए की बड़ी जीत के बाद उप-मुख्यमंत्री पद को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कैबिनेट की बैठक समाप्त होते ही इस्तीफे की औपचारिकताएं पूरी की गई और अब पूरा ध्यान उप-मुख्यमंत्री के चयन पर केंद्रित है। चुनाव में एनडीए ने 200 से अधिक सीटें जीतते ही मुख्यमंत्री पद पर किसी तरह की अनिश्चितता समाप्त हो गई लेकिन उप-मुख्यमंत्री पद को लेकर रणनीतिक मंथन जारी है।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, इस बार उप-मुख्यमंत्री के चयन में जातीय संतुलन और जेंडर बैलेंस दोनों ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दोनों ही महिला नेताओं को अपने प्रमुख राजनीतिक ट्रंपकार्ड के रूप में इस्तेमाल करते आए हैं इसलिए इस बार उप-मुख्यमंत्री पद के लिए महिला चेहरे पर भी गंभीर विचार चल रहा है। अनुमान है कि 19 नवंबर तक इस राजनीतिक गणित का अंतिम रूप सामने आ जाएगा।
सूत्र बताते हैं कि पार्टी दो स्तर पर मंथन कर रही है पहला क्या इस बार महिला चेहरे को प्राथमिकता दी जाए और दूसरा यदि महिला कार्ड खेलना है तो इसे किस जातीय समीकरण के साथ जोड़ा जाए। इस रणनीति के तहत सवर्ण और महिला दोनों को एक ही कदम में साधने की संभावना भी विचाराधीन है। इस सूची में युवा और लोकप्रिय नेता श्रेयसी सिंह का नाम शीर्ष पर है। यदि पिछड़ा या अतिपिछड़ा वर्ग के साथ महिला कार्ड जोड़ा गया, तो रमा निषाद को उप-मुख्यमंत्री पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
महिला के बजाय पुरुष और पिछड़ा वर्ग पर दांव लगाने की स्थिति में दो प्रमुख नाम उभर रहे हैं। पहला नाम रामकृपाल यादव का है जो पाटलिपुत्र के पूर्व सांसद और अनुभवी नेता हैं। दूसरा नाम वर्तमान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का है जिन्होंने हाल के विधानसभा चुनाव में पार्टी का नेतृत्व किया और पहले भी उपमुख्यमंत्री रहे हैं।
सवर्ण वर्ग से भी कई नाम चर्चा में हैं। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय नीतीश कुमार के साथ अच्छे समीकरण के कारण प्रमुख दावेदार हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा का नाम भी चर्चाओं में था, लेकिन उनके विधानसभा अध्यक्ष बनने की संभावना अधिक मानी जा रही है। इसके अलावा, विधायक रजनीश कुमार का नाम भी तेज़ी से उभर रहा है। वे पार्टी के सचेतक रह चुके हैं और भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं।
कुल मिलाकर, बिहार का उप-मुख्यमंत्री पद जाति, जेंडर और राजनीतिक संतुलन के त्रिकोण पर टिके एक बड़े निर्णय की ओर बढ़ रहा है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह निर्णय राज्य की सियासी दिशा और गठबंधन की सामूहिक रणनीति को प्रभावित करेगा।