अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में ब्लू ओरिजिन ने एक नया इतिहास रच दिया है। कंपनी ने अपने शक्तिशाली न्यू ग्लेन रॉकेट की सहायता से NASA के दो मंगल मिशन स्पेसक्राफ्ट को अंतरिक्ष में भेजकर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस मिशन की सबसे खास बात यह रही कि रॉकेट का विशाल फर्स्ट-स्टेज बूस्टर उड़ान के बाद सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर उतार लिया गया, जिससे ब्लू ओरिजिन उन चुनिंदा कंपनियों में शामिल हो गई है जो रीयूजेबल रॉकेट टेक्नोलॉजी में महारत रखती हैं। इससे पहले यह उपलब्धि केवल स्पेसएक्स ने हासिल की थी।
मौसम ने रोकी थी उड़ान, लेकिन इंतज़ार हुआ सफल
9 नवंबर को तय लॉन्चिंग मौसम संबंधी प्रतिबंधों और सुरक्षा नियमों के कारण रोकनी पड़ी थी। भारी बादलों, सौर गतिविधियों और खराब दृश्यता के कारण मिशन को लगभग चार दिनों तक स्थगित किया गया। लेकिन गुरुवार को जैसे ही मौसम अनुकूल हुआ, न्यू ग्लेन ने शानदार उड़ान भरी और ब्लू ओरिजिन ने अपने मिशन को कामयाबी के साथ पूरा किया।
पहले से मजबूत, इस बार अधिक परफेक्ट
जनवरी में न्यू ग्लेन की पहली परीक्षण उड़ान में प्रोटोटाइप सैटेलाइट तो कक्षा में पहुंचा दिया गया था, लेकिन बूस्टर समुद्र में मौजूद फ्लोटिंग प्लेटफ़ॉर्म पर लैंड नहीं हो पाया था। इस बार न केवल रॉकेट ने ठीक समय पर उड़ान भरी, बल्कि बूस्टर ने जमीन पर सुरक्षित और स्थिर लैंडिंग कर कंपनी के लिए बड़ी तकनीकी जीत दर्ज की।
उड़ान की सफलता के बाद ब्लू ओरिजिन टीम में उत्साह चरम पर था और कर्मचारियों ने नारा लगाया- “अगला पड़ाव, चांद!”
अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा में ब्लू ओरिजिन का नया कदम
रीयूजेबल रॉकेट की यह सफलता न केवल लागत घटाएगी बल्कि भविष्य के चंद्र और मंगल मिशनों के लिए भी बड़ा रास्ता खोलेगी।
ब्लू ओरिजिन का यह कदम निजी अंतरिक्ष कंपनियों की रेस में उसकी स्थिति को और मजबूत बनाता है।