काठमांडू – नेपाल इस समय एक अभूतपूर्व राजनीतिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद देशभर में हालात और भी तनावपूर्ण हो गए हैं। राजधानी काठमांडू सहित कई बड़े शहरों में हिंसक विरोध प्रदर्शन, आगजनी और सरकारी इमारतों पर हमलों ने माहौल को विस्फोटक बना दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट केवल सरकार की विफलता नहीं बल्कि भ्रष्टाचार, सोशल मीडिया पर प्रतिबंध, और युवाओं की गहराती नाराजगी का नतीजा है।
भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया प्रतिबंध बना गुस्से की जड़
नेपाल में पिछले कई महीनों से भ्रष्टाचार के मुद्दे पर विपक्ष और सिविल सोसाइटी लगातार आवाज उठा रहे थे। इसके अलावा सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध ने युवाओं में आक्रोश भर दिया। युवाओं का कहना है कि सरकार उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है, जिससे उनका गुस्सा सड़कों पर हिंसक प्रदर्शनों में तब्दील हो गया।
हिंसक प्रदर्शन और आगजनी
प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को संसद भवन और अन्य सरकारी इमारतों पर कब्जा करने की कोशिश की। कई स्थानों पर आगजनी और तोड़फोड़ हुई। जानकारी के मुताबिक, अब तक इस हिंसा में 19 लोगों की मौत हो चुकी है। भारी विरोध प्रदर्शनों के कारण प्रशासन ने कर्फ्यू और इंटरनेट बंद जैसी आपातकालीन कार्रवाई की है। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा केवल सरकारी इमारतों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने प्रमुख राजनीतिक नेताओं के घरों में भी आगजनी की। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’, शेर बहादुर देउबा, इस्तीफा देने वाले गृह मंत्री रमेश लेखक, संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग, के आवास शामिल हैं।
इस्तीफों की लहर, सरकार बिखरने की कगार पर
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद कैबिनेट में भी इस्तीफों का दौर शुरू हो गया। गृह मंत्री रमेश लेखक, कृषि मंत्री रामनाथ अधिकारी, स्वास्थ्य मंत्री प्रदीप पौडेल, जल आपूर्ति मंत्री प्रदीप यादव ने भी अपने पद छोड़ दिए हैं। गठबंधन सरकार, जो जुलाई 2024 से सत्ता में थी, टूटने के कगार पर है। राजनीतिक अस्थिरता से आर्थिक स्थिति पर भी गहरा असर पड़ने की आशंका है।
विपक्षी दलों का आरोप – ‘ओली सरकार ने युवाओं की आवाज नहीं सुनी’
विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली पर प्रदर्शनकारियों की मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। सिंह दरबार में विपक्षी नेताओं की बैठक के बाद यह स्पष्ट हो गया कि ओली के नेतृत्व वाली सरकार अब देश की परिस्थितियों को संभालने में विफल रही है। ओली के इस्तीफे को विपक्ष ने युवाओं के संघर्ष की जीत बताया है।
राष्ट्रपति के आवास तक पहुंचा गुस्सा
स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के निजी आवास के बाहर भी आगजनी और गोलीबारी हुई। सुरक्षा व्यवस्था चरमरा गई और सरकारी इमारतों व मंत्रियों के कार्यालयों में फायरिंग की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। सैन्य बलों को कई जगह तैनात करना पड़ा है।
पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह की अपील – ‘युवाओं की आवाज सुनें’
नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह ने हिंसा और रक्तपात पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा कि युवाओं की मांगों को गंभीरता से न लेने से हालात बिगड़े हैं। उन्होंने सरकार और राजनीतिक दलों से अपील की कि वे युवाओं की आवाज सुनें और जल्द समाधान निकालें।
युवा वर्ग की नाराजगी – भविष्य का सवाल
नेपाल में 60% से अधिक आबादी युवा है। सोशल मीडिया प्रतिबंध और बेरोजगारी के मुद्दों ने उन्हें सरकार के खिलाफ खड़ा कर दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संकट तभी थमेगा जब नई सरकार पारदर्शिता, जवाबदेही और रोजगार के मुद्दों पर ठोस कदम उठाए।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें नेपाल पर
नेपाल के हालात पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी नजर रख रहा है। भारत, चीन और अमेरिका ने अपने नागरिकों को सुरक्षा को लेकर अलर्ट जारी किया है। संयुक्त राष्ट्र ने नेपाल में शांति बहाली की अपील की है।
आगे क्या?
प्रधानमंत्री के इस्तीफे के बाद नई सरकार का गठन कैसे होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। अगले कुछ दिनों में नेपाल की राजनीति का नया समीकरण सामने आ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो नेपाल में और भी व्यापक अस्थिरता देखने को मिल सकती है।