बिहार में विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने ही वाला है। सभी दल और नेता अपनी-अपनी रणनीतियों में जुट चुके हैं। इस बीच जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) लगातार प्रदेशभर में रैलियां और सभाएं कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने एक सभा में यह इच्छा जाहिर की कि वे अपनी जन्मभूमि या कर्मभूमि से ही विधानसभा चुनाव लड़ना चाहेंगे।
प्रशांत किशोर का पैतृक गांव रोहतास जिले के करगहर विधानसभा क्षेत्र के कोनार में है। लोकल 18 की टीम जब कोनार पहुंची तो वहां के लोग अपने नेता को लेकर बेहद उत्साहित नजर आए। गांव के लोगों से जब पूछा गया कि अगर प्रशांत किशोर करगहर से चुनाव लड़ते हैं तो उन्हें कितना समर्थन मिलेगा, तो जवाब में गांव के लोगों ने खुलकर अपनी राय रखी।
‘हराना आसान नहीं होगा’ – केदार पांडेय
कोनार गांव के रहने वाले केदार पांडेय ने बताया कि अगर प्रशांत किशोर करगहर से चुनाव लड़ते हैं तो यहां किसी भी प्रत्याशी के लिए उनका मुकाबला करना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा, “NDA गठबंधन जरूर कोशिश करेगा, लेकिन प्रशांत किशोर को हराना आसान नहीं होगा। वे महात्मा गांधी की तरह जमीन से जुड़े नेता हैं, जात-पात और धर्म के बजाय गरीबों और किसानों की आवाज बन रहे हैं।”
केदार पांडेय ने आगे कहा कि न सिर्फ कोनार गांव बल्कि पूरे करगहर विधानसभा क्षेत्र के लोग उनके साथ हैं। वे मानते हैं कि प्रशांत किशोर की ईमानदार छवि और नयी सोच उन्हें चुनाव में भारी बढ़त दिला सकती है।
‘उनकी मुहिम सफल होगी’ – गांव के बुजुर्ग
गांव के ही एक बुजुर्ग ने कहा, “प्रशांत किशोर जिस मुहिम को लेकर चले हैं, उसमें वह सौ प्रतिशत सफल होंगे। आज तक इस वर्ग का समर्थन किसी नेता को नहीं मिला, जितना समर्थन उन्हें मिल रहा है। वे रोजगार, शिक्षा, युवाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण की बात करते हैं, यही वजह है कि लोग उनके साथ खड़े हैं।” बुजुर्ग ने यह भी कहा कि प्रशांत किशोर ने बिहार की राजनीति में एक नई उम्मीद जगाई है। उनका मानना है कि यह चुनाव केवल एक सीट का नहीं, बल्कि एक विचारधारा और नई राजनीति का चुनाव होगा।
‘ईमानदार और कर्मठ नेता’ – युवा रोहित पांडेय
युवा रोहित पांडेय ने मीडिया से कहा, “हमने समाचार माध्यमों से देखा कि प्रशांत किशोर ने अपनी जन्मभूमि रोहतास जिले के करगहर से 2025 का विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। यह एक स्वागत योग्य कदम है। चाहे वे कहीं से भी चुनाव लड़ें, लोग यह नहीं चाहेंगे कि इतना ईमानदार और कर्मठ नेता चुनाव हार जाए।”
रोहित पांडेय का कहना है कि प्रशांत किशोर के पास रोजगार, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के लिए एक स्पष्ट विज़न है। वे मानते हैं कि अगर वे करगहर से चुनाव लड़ते हैं तो यह पूरे क्षेत्र के लिए एक सुनहरा अवसर होगा। रोहित ने कहा, “यह हमारा सौभाग्य होगा कि हमें पहली बार एक अच्छे नेता को वोट देने का मौका मिलेगा।”
‘सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, विचारधारा का नाम’ – संजय पांडेय
गांव के एक और निवासी संजय पांडेय ने कहा, “प्रशांत किशोर सिर्फ एक व्यक्ति का नाम नहीं, बल्कि एक विचारधारा का नाम है। उन्हें करगहर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना ही चाहिए। उनके पास दुनिया की सारी सुविधाएं हैं, लेकिन फिर भी वे जनता की सेवा के लिए मैदान में उतर कर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। यह काबिल-ए-तारीफ है।” संजय पांडेय ने बताया कि उनकी मेहनत को देखकर न सिर्फ बिहार बल्कि विदेशों में रह रहे बिहारी लोग भी उन्हें समर्थन दे रहे हैं और चुनाव में यहां आकर वोट करने की बात कर रहे हैं।
प्रशांत किशोर की छवि और राजनीति का असर
प्रशांत किशोर लंबे समय तक देशभर की राजनीतिक पार्टियों के चुनावी रणनीतिकार रहे हैं। अब उन्होंने अपनी जन सुराज यात्रा के माध्यम से बिहार के गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद किया है। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों को लेकर वे लगातार मुखर रहे हैं।
गांव वालों का मानना है कि प्रशांत किशोर का राजनीति में उतरना महज चुनाव जीतने के लिए नहीं, बल्कि बिहार की तस्वीर बदलने के लिए है। उनका कहना है कि एक ऐसा नेता जो पहले से सफल और समृद्ध है, यदि जनता के बीच रहकर उनकी समस्याएं सुनता है, तो यह लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण है।
करगहर की राजनीति में नई हलचल
करगहर विधानसभा क्षेत्र में प्रशांत किशोर की चर्चा ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। यहां के स्थानीय नेता भी मानते हैं कि यदि PK चुनाव मैदान में उतरते हैं तो समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। गांव वालों की राय से साफ है कि PK को करगहर से भारी समर्थन मिल सकता है।