लखनऊ विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग के अंतर्गत एम.कॉम. प्रथम वर्ष में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए अभिविन्यास कार्यक्रम ‘दीक्षाआरम्भ’ का आयोजन 1 सितंबर 2025 को हुआ। इस अवसर पर विभाग का माहौल नए उत्साह और ऊर्जा से भरा रहा।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को विभाग की शैक्षणिक संरचना, पाठ्यक्रम की विशेषताओं और वाणिज्य शिक्षा में नए आयामों से अवगत कराना था। नए सत्र में कदम रखने वाले विद्यार्थियों के लिए यह दिन एक नई दिशा और नई संभावनाओं का प्रतीक बन गया।
प्रो. राम मिलन का प्रेरक उद्बोधन
कार्यक्रम की शुरुआत विभागाध्यक्ष प्रो. राम मिलन के संबोधन से हुई। उन्होंने सभी विद्यार्थियों का हार्दिक स्वागत किया और उन्हें सफलता की शुभकामनाएँ दीं। अपने उद्बोधन में प्रो. मिलन ने बताया कि विभाग का लक्ष्य केवल पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को व्यावसायिक कौशल और रोज़गारोन्मुखी क्षमताओं से सशक्त बनाना है। उन्होंने एम.कॉम. के दो वर्षीय अद्यतन पाठ्यक्रम की विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा: “आज के दौर में वाणिज्य शिक्षा को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना हमारी प्राथमिकता है। इसलिए हमने अपने पाठ्यक्रम में ऐसे विषयों को शामिल किया है, जो विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेंगे।”
नवीन पाठ्यक्रम की खासियतें
इस अवसर पर विभागाध्यक्ष ने एम.कॉम. पाठ्यक्रम के नवीन विषयों की विशेष जानकारी साझा की। उनका उद्देश्य विद्यार्थियों को इंडस्ट्री-रेडी बनाना है। नए पाठ्यक्रम की मुख्य विशेषताएँ:
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI):
विद्यार्थियों को डाटा एनालिटिक्स, वित्तीय मॉडलिंग और बिज़नेस निर्णय लेने में एआई के उपयोग की गहन समझ।
क्लाउड कंप्यूटिंग:
व्यापारिक प्रक्रियाओं, ई-कॉमर्स और ऑनलाइन लेन-देन में क्लाउड तकनीक का महत्व।
अंतर्राष्ट्रीय कराधान:
वैश्विक व्यापारिक परिदृश्य में टैक्सेशन की नई नीतियाँ और अंतर्राष्ट्रीय कर मानकों की जानकारी।
सस्टेनेबल फाइनेंस:
पर्यावरण-अनुकूल निवेश रणनीतियों, ग्रीन इकॉनॉमी और जिम्मेदार वित्तीय प्रबंधन पर आधारित शिक्षा।
कॉस्मेटिक अकाउंटिंग:
कॉर्पोरेट फाइनेंसिंग में रचनात्मक अकाउंटिंग तकनीकों और नैतिक पहलुओं की समझ।
वाणिज्य शिक्षा के नए आयाम
कार्यक्रम में वाणिज्य संकायाध्यक्ष प्रो. अर्चना सिंह ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज की वाणिज्य शिक्षा परंपरागत सीमाओं से आगे निकल चुकी है। “आधुनिक समय में वाणिज्य केवल लेन-देन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि डिजिटल इनोवेशन, वैश्विक नीतियों, और डेटा-आधारित निर्णयों का संगम है। विद्यार्थियों को इन नए बदलावों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना होगा।”
शिक्षकों और शोधार्थियों की सक्रिय उपस्थिति
‘दीक्षाआरम्भ’ कार्यक्रम में वाणिज्य विभाग के सभी वरिष्ठ शिक्षकगण, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे। कार्यक्रम में जिन गणमान्य प्रोफेसरों की उपस्थिति रही, उनमें शामिल थे:
- प्रो. सोमेश कुमार शुक्ला
- डीन सी.डी.सी. प्रो. अवधेश कुमार
- प्रो. सुनीता श्रीवास्तव
- प्रो. गीतिका टी. कपूर
इन सभी शिक्षकों ने नए विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाया और उन्हें आने वाले दो वर्षों की शैक्षणिक यात्रा के लिए प्रेरित किया।
विद्यार्थियों के लिए सुनहरा अवसर
कार्यक्रम के दौरान नए विद्यार्थियों को विभाग द्वारा संचालित की जाने वाली संशोधन परियोजनाओं, इंटर्नशिप प्रोग्राम्स और कॉर्पोरेट प्रशिक्षण के बारे में भी जानकारी दी गई। विभाग का प्रयास है कि विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान नहीं बल्कि व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान किया जाए।
भविष्य के लिए बेहतर तैयारी
‘दीक्षाआरम्भ’ कार्यक्रम ने स्पष्ट किया कि लखनऊ विश्वविद्यालय का वाणिज्य विभाग रोज़गारोन्मुखी शिक्षा और वैश्विक स्तर की रिसर्च के लिए प्रतिबद्ध है। इस कार्यक्रम के बाद विद्यार्थियों में नए पाठ्यक्रम और अवसरों को लेकर गजब का उत्साह देखने को मिला।