पटना। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस ने बड़ा दावा किया था। पार्टी ने कहा कि उसने आयोग को 89 लाख दावे-आपत्तियां और शिकायतें सौंपी हैं। लेकिन अब चुनाव आयोग ने इस दावे पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। आयोग के अधिकारियों का कहना है कि कांग्रेस का यह दावा पूरी तरह असत्य है। रिकार्ड्स की जांच में यह पाया गया कि कांग्रेस की ओर से न तो निर्धारित प्रारूप और न ही घोषणा पत्र के साथ एक भी आवेदन आयोग को सौंपा गया है।
किन दलों ने दिए आवेदन?
चुनाव आयोग के मुताबिक अब तक केवल सीपीआईएमएल और राजद की ओर से निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावे और आपत्तियां प्रस्तुत की गई हैं। सीपीआईएमएल ने 103 नाम हटाने और 15 नाम जोड़वाने के लिए आवेदन दिया। राजद ने 10 नाम जुड़वाने के लिए आवेदन सौंपे। लेकिन कांग्रेस की ओर से एक भी आवेदन निर्धारित वैधानिक प्रारूप (फॉर्म-6,7,8 आदि) में नहीं मिला।
जिलाध्यक्षों द्वारा दी गई सूचियां मान्य नहीं
आयोग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जिलाध्यक्ष स्तर पर राजनीतिक दलों द्वारा सामूहिक सूचियां जमा कराना वैधानिक दावा/आपत्ति नहीं माना जाता। ऐसी रसीदें केवल प्राप्ति-स्वीकृति होती हैं। आयोग का कहना है कि वह समय-समय पर सार्वजनिक डोमेन में प्राप्त दावे/आपत्तियों की स्थिति प्रकाशित करता रहा है।
बीएलए द्वारा आवेदन की प्रक्रिया
निर्वाचन नियमों के अनुसार – प्रत्येक बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) प्रतिदिन अधिकतम 10 प्रपत्र और कुल मिलाकर 30 प्रपत्र ही जमा कर सकता है। हर आवेदन पर निर्वाचक का हस्ताक्षर होना अनिवार्य है। संबंधित वैधानिक फार्म (6,7,8 आदि) संलग्न होना चाहिए। आयोग के अनुसार, कांग्रेस द्वारा 31 अगस्त तक प्रस्तुत अधिकांश आवेदन निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं पाए गए।
महिलाओं के नाम हटाने पर उठे सवाल
कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि मतदाता सूची से महिलाओं के नामों को निशाना बनाकर हटाया जा रहा है। इस पर आयोग ने कहा – स्थानांतरण (Migration), मृतक (Dead) और डुप्लीकेट प्रविष्टियां लैंगिक रूप से निष्पक्ष होती हैं। ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के नामों में वर्तनी या पिता/पति के नामों में भिन्नता के कारण डुप्लीकेट प्रविष्टियां अधिक होती हैं। कई महिलाओं का नाम पिता के पते और पति के पते – दोनों जगह दर्ज रहता है। ऐसे मामलों में उनका नाम एक प्रविष्टि से हटाना पड़ता है।
अब तक कितने आवेदन आए?
दैनिक सूचना रिपोर्ट (SIR) के अनुसार, आयोग को अब तक – 2,07,565 आपत्तियां (नाम हटाने के लिए), 33,326 दावे (नाम जोड़ने के लिए), 15,32,438 आवेदन (पहली बार 18 वर्ष पूरे करने वाले नए मतदाताओं के) प्राप्त हुए हैं। यह संख्या बताती है कि नई मतदाता सूची में बड़ी संख्या में युवा वोटर जुड़ने जा रहे हैं, जबकि कांग्रेस का 89 लाख का दावा अब भी सवालों के घेरे में है।
अब सवाल क्या है?
बड़ा सवाल यह है कि कांग्रेस ने 89 लाख दावों का दावा क्यों किया, जबकि आयोग के पास इसका कोई प्रमाण नहीं है? क्या कांग्रेस ने केवल राजनीतिक बयानबाज़ी की है या फिर पार्टी की ओर से प्रक्रिया के तहत सही तरीके से आवेदन नहीं किया गया? फिलहाल, आयोग के बयान के बाद बिहार की राजनीति में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है।