लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों ने टैगोर पुस्तकालय दौरे पर इतिहास और प्रौद्योगिकी की खोज की

अतीत की धरोहर और भविष्य की तकनीक का संगम — टैगोर पुस्तकालय

Vin News Network
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छात्रों ने इतिहास और तकनीक के संगम से प्रेरणा ली।
Highlights
  • लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों ने टैगोर पुस्तकालय का दौरा किया।
  • दुर्लभ पांडुलिपियाँ और 1000 साल पुरानी कलाकृतियाँ देखीं।
  • साइबर पुस्तकालय में डिजिटल सुविधाओं की जानकारी दी गई।

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग ने शुक्रवार को अपने और संबद्ध कॉलेजों के छात्रों के लिए एक शैक्षिक और रोमांचक पुस्तकालय दौरे का आयोजन किया। इस दौरे ने छात्रों को विश्वविद्यालय की शान टैगोर पुस्तकालय के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराने के साथ-साथ आधुनिक साइबर पुस्तकालय और डिजिटल संसाधनों की नई दुनिया से भी अवगत कराया।

इस शैक्षिक यात्रा का उद्देश्य छात्रों को यह समझाना था कि कैसे पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक मिलकर शिक्षा जगत को नई दिशा प्रदान कर रहे हैं।

टैगोर पुस्तकालय का ऐतिहासिक महत्व
लखनऊ विश्वविद्यालय का टैगोर पुस्तकालय न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे उत्तर भारत की शैक्षणिक धरोहरों में से एक माना जाता है। इसकी स्थापत्य कला औपनिवेशिक युग की झलक प्रस्तुत करती है। विशाल पुस्तक संग्रहालय, पुरानी पांडुलिपियाँ और दुर्लभ ग्रंथ इसे अनोखा बनाते हैं। छात्रों को विशेष रूप से 1000 साल पुरानी कलाकृतियों और हस्तलिखित पांडुलिपियों को देखकर गहरी रुचि उत्पन्न हुई। यह पुस्तकालय केवल किताबों का घर नहीं बल्कि इतिहास, संस्कृति और ज्ञान का जीवंत प्रतीक है।

आधुनिक स्वरूप : साइबर पुस्तकालय
मुख्य भवन के दौरे के बाद छात्रों को साइबर पुस्तकालय भी दिखाया गया। यहां ई-कैटलॉग के जरिए छात्र तुरंत पुस्तकों की खोज कर सकते हैं। डिजिटल आर्काइव और रिमोट एक्सेस सुविधाओं ने रिसर्च करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। उप लाइब्रेरियन डॉ. ज्योति मिश्रा ने छात्रों को डिजिटल संसाधनों, जर्नल्स और ऑनलाइन डेटाबेस तक पहुंचने के तरीकों की जानकारी दी। इस अनुभव ने छात्रों को यह समझने में मदद की कि आधुनिक शिक्षा केवल ऑफलाइन किताबों तक सीमित नहीं है बल्कि अब वह क्लिक की दूरी पर उपलब्ध है।

छात्रों की प्रतिक्रियाएँ

  • दौरे में शामिल छात्रों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा—
  • “इतिहास और तकनीक का ऐसा संगम पहली बार देखा।”
  • “पांडुलिपियों ने हमें अतीत से जोड़ दिया और साइबर लाइब्रेरी ने भविष्य की झलक दिखाई।”
  • “यह केवल शैक्षिक यात्रा नहीं बल्कि प्रेरणा का स्रोत था।”

प्रोफेसरों की भूमिका
विभागाध्यक्ष प्रो. अर्चना शुक्ला ने कहा, “छात्र वास्तव में मंत्रमुग्ध थे। ज्ञान केवल शेल्फ पर रखी किताबों का नाम नहीं है, बल्कि यह अतीत से जुड़ने और भविष्य की राह बनाने का माध्यम है।” मानद लाइब्रेरियन प्रो. कीया पांडे की उपस्थिति ने इस आयोजन को और विशेष बना दिया। उन्होंने पुस्तकालय के महत्व और डिजिटल ट्रांजिशन के भविष्य पर प्रकाश डाला।

भविष्य के लिए विज़न
विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह स्पष्ट किया कि टैगोर पुस्तकालय का डिजिटलीकरण केवल सुविधा के लिए नहीं बल्कि शोध, नवाचार और वैश्विक शिक्षा से जुड़ने का प्रयास है। भविष्य में इस लाइब्रेरी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोधकर्ताओं के लिए भी खोलने की योजना है। यह दौरा न केवल छात्रों के लिए शैक्षिक अनुभव था, बल्कि इसने यह संदेश भी दिया कि ज्ञान का असली मूल्य अतीत की जड़ों और भविष्य की तकनीक दोनों को साथ लेकर चलने में है।

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