दिल्ली और देश के तीन अन्य राज्यों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को 260 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़े मामले में बड़ा एक्शन लिया। मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत की गई इस कार्रवाई में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और हरियाणा के कुल 11 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई।
कैसे रची गई 260 करोड़ की साइबर ठगी की साजिश?
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी (जैसे इनकम टैक्स, ईडी या सीबीआई अफसर) बताकर आम लोगों को कॉल किया। इन कॉल्स में उन्हें कहा गया कि उनका नाम किसी अपराध या मनी लॉन्ड्रिंग केस में जुड़ा है और अगर तुरंत पैसे नहीं भेजे गए, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। डर और भ्रम की स्थिति में फंसे लोग ठगों की बातों में आ जाते थे और ठगों द्वारा बताए गए बैंक खातों या डिजिटल वॉलेट में पैसे ट्रांसफर कर देते थे। यह रकम बाद में क्रिप्टोकरेंसी में बदली जाती थी ताकि उसका पता न लगाया जा सके।
कैसे हुआ खुलासा?
इस ठगी की शिकायतें जब दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम सेल और सीबीआई तक पहुंचीं, तो दोनों एजेंसियों ने FIR दर्ज की। इसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग एंगल सामने आने पर प्रवर्तन निदेशालय ने जांच अपने हाथ में ली और इस घोटाले से जुड़े बैंक अकाउंट्स, डिजिटल ट्रांसफर और क्रिप्टो वॉलेट्स का तकनीकी विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि यह ठग गिरोह अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के साथ काम करता है और ठगी की रकम को ब्लॉकचेन के जरिए विदेशों में भेज दिया जाता है।
कहां-कहां हुई छापेमारी?
ED ने मंगलवार को निम्नलिखित स्थानों पर छापेमारी की:
- दिल्ली: रोहिणी, पटेल नगर, लक्ष्मी नगर इलाकों में
- उत्तर प्रदेश: नोएडा और गाजियाबाद
- महाराष्ट्र: मुंबई के कुछ स्थान
- हरियाणा: गुरुग्राम और पानीपत
इन ठिकानों से ED को भारी मात्रा में डिजिटल डाटा, फर्जी दस्तावेज, बैंक खातों की डिटेल्स, मोबाइल फोन, लैपटॉप और फर्जी सिम कार्ड मिले हैं।
क्रिप्टोकरेंसी के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग
ED अधिकारियों ने बताया कि इस साइबर ठगी में जब्त की गई रकम को तुरंत वॉलेट्स में ट्रांसफर कर क्रिप्टोकरेंसी (जैसे Bitcoin, Ethereum) में बदल दिया जाता था। इसके बाद उस रकम को इंटरनेशनल एक्सचेंजों के जरिए हांगकांग, दुबई और सिंगापुर जैसे देशों में भेजा जाता था। इसका मकसद भारत में जांच एजेंसियों की पहुंच से बचना था।
ठगों की प्रोफाइल
जांच में सामने आया कि ये लोग अच्छी अंग्रेजी बोलने वाले, पेशेवर स्क्रिप्ट राइटर और IT एक्सपर्ट्स को हायर करते थे। ये लोग कॉल सेंटर के अंदाज में काम करते थे और इंटरनेशनल नंबर से कॉल करते थे, ताकि लोगों को शक न हो। कुछ आरोपियों के पास फर्जी पुलिस यूनिफॉर्म, ID कार्ड और वीडियो कॉलिंग सेटअप भी मिले हैं जिससे वे खुद को सरकारी अधिकारी दिखाते थे।
पीड़ित कौन थे?
ज्यादातर ठगी के शिकार लोग बुजुर्ग, अकेले रहने वाले लोग, NRIs और महिलाएं थीं। इनमें से कई लोगों ने डर के कारण पैसे भेज दिए और बाद में ठगी का अहसास हुआ।
अब तक की कार्रवाई और आगे की योजना
ED ने इस मामले में अभी तक करीब 40 बैंक अकाउंट्स को सीज़ किया है जिनमें 12 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जमा पाई गई है। साथ ही, कई डिजिटल वॉलेट्स और क्रिप्टो वॉलेट्स को भी ब्लॉक किया गया है। ईडी का कहना है कि यह एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय रैकेट हो सकता है और आने वाले दिनों में कुछ विदेशी नागरिकों की भी भूमिका सामने आ सकती है।
क्या बोले अधिकारी?
एक सीनियर ईडी अधिकारी ने बताया: “यह साइबर अपराध एक सुनियोजित गिरोह द्वारा चलाया जा रहा था जो टेक्नोलॉजी, डर और अवैध वित्तीय रास्तों का इस्तेमाल करके आम लोगों को शिकार बना रहा था। हमने कई सबूत जब्त किए हैं, आगे की जांच में और खुलासे होंगे।”
सावधान रहें – जानें कैसे बचें इस तरह की ठगी से:
- किसी अनजान नंबर से कॉल आने पर शांत रहें।
- सरकारी अधिकारी कोई धमकी नहीं देते – ऐसे कॉल फर्जी होते हैं।
- किसी भी बैंक या डिजिटल वॉलेट में बिना पुष्टि पैसे न भेजें।
- संदिग्ध कॉल्स की सूचना तुरंत पुलिस या साइबर सेल को दें।
- सरकारी वेबसाइटों से ही जानकारी लें।