सेवा और साहस की मिसाल बने बोट कीपर राजेन्द्र कुमार, 35 वर्षों की निष्ठावान सेवा के बाद हुए सेवानिवृत्त

नदी के सिपाही की विदाई: जब सेवा, साहस और समर्पण एक साथ झलकें

Vin News Network
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35 वर्षों की निष्ठा, साहस और सेवा को सलाम – श्री राजेन्द्र कुमार को एनसीसी की भावपूर्ण विदाई
Highlights
  • राजेन्द्र कुमार ने 35 वर्षों तक 3 यूपी नेवल यूनिट में बतौर बोट कीपर सेवा दी
  • हाल ही में ड्यूटी के दौरान डूबते व्यक्ति की जान बचाई
  • यूनिट द्वारा भावपूर्ण विदाई समारोह आयोजित

लखनऊ। एक यात्रा जो प्रेरणा बन गई: 3 यूपी नेवल यूनिट एनसीसी, लखनऊ में बतौर बोट कीपर सेवा दे रहे श्री राजेन्द्र कुमार 31 जुलाई 2025 को 35 वर्षों की अतुलनीय सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए। इस अवसर पर यूनिट के समस्त स्टाफ, कैडेट्स और अधिकारियों द्वारा भावभीना विदाई समारोह आयोजित किया गया, जो न केवल एक औपचारिक कार्यक्रम था, बल्कि एक सेवाभावी व्यक्तित्व को सम्मान देने का अद्वितीय अवसर भी बना।

कमान अधिकारी की श्रद्धांजलि
कमान अधिकारी कमांडर गौरव शुक्ला ने इस अवसर पर कहा: “राजेन्द्र कुमार की सेवा, उनका समर्पण और अनुशासन, हमारे लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने केवल यूनिट का काम नहीं संभाला, बल्कि उसे गरिमा और गौरव भी प्रदान किया। उनका जीवन दर्शन हमें बताता है कि समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा से बड़ा कोई धर्म नहीं है।” कमांडर शुक्ला ने उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं और विशेष रूप से मानवीय साहस का उल्लेख किया जो उन्होंने हाल ही में गोमती नदी में दिखाया।

एक कर्मयोगी की सेवायात्रा
राजेन्द्र कुमार ने वर्ष 1990 में 3 यूपी नेवल यूनिट एनसीसी में बतौर बोट कीपर अपनी सेवा की शुरुआत की थी। अपनी सहजता, जिम्मेदारी और तकनीकी दक्षता से उन्होंने यूनिट में अनिवार्य भूमिका निभाई। बोटों की देखरेख, कैडेट्स को नाविक प्रशिक्षण, सुरक्षा प्रबंधन और नदी अभियानों में उनकी भूमिका हमेशा अभूतपूर्व और अनुकरणीय रही।

गोमती नदी में जान बचाकर दिखाया साहस
सेवानिवृत्ति से ठीक कुछ सप्ताह पहले, एक सामान्य दिन की ड्यूटी के दौरान गोमती नदी में डूब रहे एक व्यक्ति को बचाकर उन्होंने न केवल एक जीवन की रक्षा की, बल्कि यह भी दिखा दिया कि ड्यूटी के साथ-साथ मानवता भी उनकी प्राथमिकता है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब वह व्यक्ति बहाव में बह रहा था और कोई मदद नहीं कर पा रहा था, तब राजेन्द्र कुमार ने बिना देर किए खुद नदी में छलांग लगाई और उस व्यक्ति को किनारे सुरक्षित पहुंचाया। इस कार्य की सभी अधिकारियों, कैडेट्स और समाज ने सराहना की।

“कर्तव्य ही धर्म है”
राजेन्द्र कुमार अपने विदाई भाषण में भावुक होते हुए बोले: “मैंने कभी नौकरी को काम नहीं, बल्कि पूजा समझा। जो कुछ भी मुझे सौंपा गया, उसे पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता से निभाया। आज मैं गर्व से कह सकता हूँ कि मैंने अपना हर दिन देश की सेवा में जिया।” उनके इस वक्तव्य ने सभा में उपस्थित सभी को भावविभोर कर दिया। कैडेट्स ने तालियों से उनका अभिनंदन किया।

विदाई समारोह की झलक
विदाई समारोह के दौरान यूनिट परिसर को फूलों और झंडियों से सजाया गया था। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान से हुई, इसके बाद यूनिट के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनके योगदान को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कैडेट्स द्वारा प्रस्तुत ‘सेवा गीत’ और ‘काव्यांजलि’ ने माहौल को और भी भावनात्मक बना दिया। समारोह के अंत में एक भोज का आयोजन किया गया, जिसमें सभी स्टाफ और कैडेट्स ने भाग लिया।

अनुकरणीय उदाहरण
राजेन्द्र कुमार ने यह प्रमाणित कर दिया कि किसी भी पद पर रहकर इमानदारी, साहस और निष्ठा से कार्य किया जाए तो वह व्यक्ति संस्थान ही नहीं, समाज के लिए भी प्रेरणा बन जाता है। उनकी सेवा ने यह दिखाया कि सैनिक अनुशासन और मानवता जब साथ चलते हैं, तो सेवा ‘कर्तव्य’ से कहीं आगे बढ़ जाती है – वह मिशन बन जाती है।

युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा
राजेन्द्र कुमार जैसे कर्मठ और समर्पित कर्मचारी आज के युवाओं के लिए जीवंत उदाहरण हैं कि कैसे साधारण साधनों से भी असाधारण कार्य किए जा सकते हैं। उनकी कहानी एनसीसी के सभी कैडेट्स को प्रेरित करती है कि सेवा केवल ड्यूटी नहीं, एक जीवन मूल्य है।

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