बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की आशा और ममता कार्यकर्ताओं को बड़ी सौगात दी है। उनके मानदेय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की घोषणा की गई है, जिससे न केवल इन कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा बल्कि ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी।
इस फैसले के तहत अब आशा कार्यकर्ताओं को पहले मिलने वाले ₹1000 की जगह ₹3000 की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। वहीं ममता कार्यकर्ताओं को प्रति प्रसव ₹300 की जगह ₹600 मिलेंगे।
यह निर्णय उस समय लिया गया है जब राज्य में चुनावी सरगर्मियां तेज हो रही हैं और सरकार आमजन तक सीधा संदेश पहुंचाना चाहती है कि स्वास्थ्य व महिला सशक्तिकरण सरकार की प्राथमिकता है।
आशा और ममता कार्यकर्ताओं की भूमिका क्यों है महत्वपूर्ण?
बिहार में हजारों आशा (Accredited Social Health Activists) और ममता कार्यकर्ता ग्रामीण और दूर-दराज़ क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, प्रसव सहायता, पोषण जागरूकता और प्राथमिक चिकित्सा सेवाएं प्रदान करती हैं।
इनकी मेहनत से ही राज्य की ग्रामीण स्वास्थ्य प्रणाली चलती है। हाल के वर्षों में कोरोना काल हो या टीकाकरण अभियान, इन कार्यकर्ताओं ने अभूतपूर्व कार्य किया है।
सरकार की मंशा और संदेश
नीतीश कुमार सरकार का यह कदम न केवल आर्थिक सहायता है, बल्कि एक प्रशंसा और प्रोत्साहन का प्रतीक है।
यह स्पष्ट संकेत है कि आगामी चुनावों में सरकार महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य सेवाएं और जमीनी कार्यकर्ताओं को केंद्र में रखकर आगे बढ़ना चाहती है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार
हालांकि अभी तक विपक्ष की ओर से इस घोषणा पर कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन चुनावी मौसम में इसे ‘लुभावनी राजनीति’ के तौर पर भी देखा जा सकता है। परंतु इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि इससे लाखों महिलाओं को आर्थिक राहत और मनोबल दोनों मिलेगा।