जातीय जनगणना का नोटिफिकेशन जारी : पहला फेज में अक्टूबर-2026 से चार राज्यों में, बाकी राज्यों में 1 मार्च 2027 से होगी

1 मार्च 2027 से दूसरा फेज शुरू होगा। इसमें देश के बाकी राज्यों में जनगणना शुरू होगी। केंद्र ने 30 अप्रैल 2025 को जातीय जनगणना कराने का ऐलान किया था।

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जातीय जनगणना का नोटिफिकेशन जारी : पहला फेज में अक्टूबर-2026 से चार राज्यों में, बाकी राज्यों में 1 मार्च 2027 से होगी

नई दिल्ली : गृह मंत्रालय ने सोमवार को जातीय जनगणना के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दी है। केंद्र सरकार दो फेज में जातीय जनगणना कराएगी। नोटिफिकेशन के मुताबिक, पहले फेज की शुरुआत 1 अक्टूबर 2026 से होगी। इसमें 4 पहाड़ी राज्य- हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख शामिल हैं।

1 मार्च 2027 से दूसरा फेज शुरू होगा। इसमें देश के बाकी राज्यों में जनगणना शुरू होगी। केंद्र ने 30 अप्रैल 2025 को जातीय जनगणना कराने का ऐलान किया था। देश में आजादी के बाद यह पहली जातीय जनगणना होगी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि जातीय जनगणना को मूल जनगणना के साथ ही कराया जाएगा।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, आज की जो अधिसूचना आई है इसमें नई बात क्या है? इसमें यही कहा गया है न कि जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में अक्टूबर 2026 को भारत के अन्य राज्यों में मार्च 2027 को जनगणना होगी, यह तो 30 अप्रैल को ही घोषणा की गई थी तो यह बहुत प्रचारित अधिसूचना है, अंत में क्या निकला, यही जो 30 अप्रैल को आपने घोषणा की थी वही दोहराया है और इसमें सिर्फ जनगणना की बात है, जातीय जनगणना की बात नहीं है,क्यों इसमें जाति को लेकर कोई जिक्र नहीं किया गया, इसमें जाति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई, कितने सवाल होंगे, क्या सिर्फ गिनती होगी या सामाजिक, आर्थिक स्थिति पर भी सवाल होंगे इसके बारे में कुछ नहीं है। हेडलाइन बनाने के लिए उन्होंने यह अधिसूचना निकाली। बहुत से सवाल हैं और हम यह दबाव कायम रखेंगे कि तेलंगाना मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर अपनाया जाना चाहिए।

भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी का ये बहुत बड़ा फैसला है कि जो जनगणना लंबित थी वह की जाएगी, जनगणना के बाद हमें समझ में आता है कि हमारे देश की जनसांख्यिकी क्या है, अलग-अलग वर्टिकल की क्या स्थिति है, किसके लिए क्या योजना बननी चाहिए, इस बारे में बहुत कुछ पता चलता है। जहां तक ​​जाति जनगणना का सवाल है तो कांग्रेस के लोग कह रहे हैं कि ये उनकी वजह से हुआ, मैं उन्हें याद दिलाना चाहता हूं कि जब देश में उनकी सरकार थी तो कैबिनेट ने फैसला किया था कि जाति जनगणना होगी लेकिन कांग्रेस ने कभी नहीं कराई। ये फैसला प्रधानमंत्री मोदी का है और हमें गर्व है कि प्रधानमंत्री सम-सामायिक फैसले लेने में कोई कोताही नहीं करते।

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, राहुल गांधी के अथक प्रयासों का यह परिणाम है कि मोदी सरकार को झुकना पड़ा और कहना पड़ा कि वे जनगणना करेंगे और जाति जनगणना करेंगे। हमारी मांग स्पष्ट है कि मुद्दे को भटकाने की कोशिश न की जाए, हमने जाति जनगणना की मांग की है। इसके कारण, कांग्रेस पार्टी के खिलाफ बहुत सारी गालियां, टिप्पणियां, आलोचनाएं सुनने को मिली हैं कि केवल 4 जातियां हैं और कोई अन्य जातियां नहीं हैं, जो अन्य जातियों की बात करते हैं वे भारत को विभाजित करने की बात कर रहे हैं। अब वही भाजपा जिसने हमारी जाति जनगणना की मांग को लेकर हम पर कई आरोप लगाए थे कि कांग्रेस, राहुल गांधी भारत को कमजोर करने के लिए जाति जनगणना की बात कर रहे हैं, लेकिन धीरे-धीरे अब उन्हें एहसास हुआ कि यह काम नहीं करेगा और खासकर बिहार चुनाव को देखते हुए उन्होंने जाति जनगणना की घोषणा की ताकि वे इसका सारा श्रेय ले सकें।

कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल जाति जनगणना कराने की मांग करते रहे हैं। देश में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। इसे हर 10 साल में किया जाता है। इस हिसाब से 2021 में अगली जनगणना होनी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे टाल दिया गया था।

मनमोहन सिंह सरकार के दौरान 2011 में सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना करवाई गई थी। इसे ग्रामीण विकास मंत्रालय, शहरी विकास मंत्रालय और गृह मंत्रालय ने करवाया था। हालांकि इस सर्वेक्षण के आंकड़े कभी भी सार्वजनिक नहीं किए गए। ग्रामीण विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर इसके SC-ST हाउसहोल्ड के आंकड़े ही जारी किए गए हैं।

जनगणना एक्ट 1948 में SC-ST की गणना का प्रावधान है। ओबीसी की गणना के लिए इसमें संशोधन करना होगा। इससे ओबीसी की 2,650 जातियों के आंकड़े सामने आएंगे। 2011 की जनगणना के अनुसार, 1,270 SC, 748 एसटी जातियां हैं। 2011 में SC आबादी 16.6% और एसटी 8.6% थी।

जनगणना एक्ट 1948 में SC-ST की गणना का प्रावधान है। ओबीसी की गणना के लिए इसमें संशोधन करना होगा। इससे ओबीसी की 2,650 जातियों के आंकड़े सामने आएंगे। 2011 की जनगणना के अनुसार, 1,270 SC, 748 एसटी जातियां हैं। 2011 में SC आबादी 16.6% और एसटी 8.6% थी।

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 2023 में सबसे पहले जाति जनगणना की मांग की थी। इसके बाद वे देश-विदेश की कई सभाओं और फोरम पर केंद्र से जाति जनगणना कराने की मांग करते रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा, ‘1947 से जाति जनगणना नहीं की गई। कांग्रेस की सरकारों ने हमेशा जाति जनगणना का विरोध किया। 2010 में दिवंगत डॉ. मनमोहन सिंह सिंह ने कहा था कि जाति जनगणना के मामले पर कैबिनेट में विचार किया जाना चाहिए। इस विषय पर विचार करने के लिए मंत्रियों का एक समूह बनाया गया था। अधिकांश राजनीतिक दलों ने जाति जनगणना की सिफारिश की। इसके बावजूद कांग्रेस सरकार ने जाति का सर्वेक्षण या जाति जनगणना कराने का फैसला नहीं किया।

80 के दशक में जातियों पर आधारित कई क्षेत्रीय पार्टियां उभरीं। इन पार्टियों ने सरकारी शिक्षण संस्थानों और नौकरियों में आरक्षण दिए जाने को लेकर अभियान चलाया। इसी दौरान जातियों की संख्या के आधार पर आरक्षण की मांग सबसे पहले UP में बसपा नेता कांशीराम ने की।

भारत सरकार ने साल 1979 में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ी जातियों को आरक्षण देने के मसले पर मंडल कमीशन का गठन किया। मंडल कमीशन ने OBC के लोगों को आरक्षण देने की सिफारिश की। इस सिफारिश को 1990 में उस वक्त के प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने लागू किया। इसके बाद देशभर में सामान्य श्रेणी के छात्रों ने उग्र विरोध प्रदर्शन किए।

साल 2010 में लालू प्रसाद यादव और मुलायम सिंह यादव जैसे OBC नेताओं ने मनमोहन सरकार पर जातिगत जनगणना कराने का दबाव बनाया। इसके साथ ही पिछड़ी जाति के कांग्रेस नेता भी ऐसा चाहते थे।
मनमोहन सरकार ने 2011 में सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना यानी SECC कराने का फैसला किया।

इसके लिए 4 हजार 389 करोड़ रुपए का बजट पास हुआ। 2013 में ये जनगणना पूरी हुई, लेकिन इसमें जातियों का डेटा आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।

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