केंद्रीय प्रशिक्षुता परिषद ने एनएपीएस और एनएटीएस के तहत युवाओं के लिए वजीफे में 36 प्रतिशत वृद्धि की सिफारिश की

सदस्यों ने अप्रेंटिसशिप इकोसिस्टम में अधिक नियोक्ताओं को लाने के लिए प्रतिष्ठान कवरेज का विस्तार करने के महत्व पर भी जोर दिया।

Vin News Network
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केंद्रीय प्रशिक्षुता परिषद ने एनएपीएस और एनएटीएस के तहत युवाओं के लिए वजीफे में 36 प्रतिशत वृद्धि की सिफारिश की

नई दिल्ली : भारत के युवाओं के लिए प्रशिक्षुता को अधिक लाभकारी और आकांक्षापूर्ण बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया हैं। कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी की अध्यक्षता में केंद्रीय प्रशिक्षुता परिषद (सीएसी) की 38वीं बैठक में राष्ट्रीय प्रशिक्षुता संवर्धन योजना (एनएपीएस) और राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रशिक्षण योजना (एनएटीएस) के तहत दिए जाने वाले वजीफे में 36 प्रतिशत की वृद्धि की सिफारिश की गई हैं।

इस सिफारिश में मौजूदा 5,000-9,000 रुपए से लेकर 6,800-12,300 रुपए तक के वजीफे की सीमा को संशोधित किया जाएगा। इसका उद्देश्य पाठ्यक्रम अधुरा छोड़ने वालों की संख्या को कम करना और विभिन्न क्षेत्रों में अधिक उम्मीदवारों को आकर्षित करना है। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित केंद्रीय प्रशिक्षुता परिषद की बैठक में भारत के उभरते प्रशिक्षुता परिदृश्य की समीक्षा की गई और परिणाम में सुधार के लिए महत्वपूर्ण सुधारों पर चर्चा की गई।

चर्चा के दौरान वजीफा संशोधन पर मुख्य रूप से ध्यान दिया गया और इसे जुलाई में वेतन वृद्धि चक्र के साथ संरेखित करते हुए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में परिवर्तन के आधार पर प्रत्येक दो साल में स्वचालित रूप से समायोजित करने का प्रस्ताव है। यह कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र के तहत किया जाएगा और बाद में प्रशिक्षुता नियम, 1992 के नियम 11 के तहत समिति को रिपोर्ट किया जाएगा। प्रस्ताव अब अंतिम मंजूरी के लिए मंत्रीमंडल को भेजा जाएगा।

जयंत चौधरी ने अपने मुख्य भाषण में कहा कि प्रशिक्षुता केवल कौशल प्रदान करने का तंत्र नहीं है, यह एक ऐसा माध्यम है जो खासकर हमारे ग्रामीण युवाओं के लिए शिक्षा, उद्योग और रोजगार को जोड़ता है। एनएपीएस और एनएटीएस को एक मजबूत कानूनी ढांचे द्वारा समर्थित स्तंभों के रूप में देखते हुए, हम इसे अधिक समावेशी, उत्तरदायी और आकांक्षापूर्ण बनाने के लिए सक्रिय रूप से सुधार कर रहे हैं। एनएटीएस के तहत उच्च शिक्षा संस्थानों को माइक्रो-प्रशिक्षुता, वैकल्पिक व्यापार और अधिक स्वायत्तता की शुरूआत प्रभाव को बढ़ाने और गहरा करने की हमारी रणनीति का हिस्सा है। समावेशिता इन कार्यक्रमों के मूल में है, और हमने इसे मजबूत करने के लिए प्रमुख सुधार पेश किए हैं। हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हर युवा व्यक्ति, चाहे उसकी पृष्ठभूमि कुछ भी हो, व्यावहारिक शिक्षा और उद्योग के संपर्क के माध्यम से एक सार्थक करियर में उचित अवसर प्राप्त करे।

परिषद ने प्रशिक्षुता-एकीकृत शिक्षा को मजबूत करने और प्रशिक्षुता नियम, 1992 के तहत नीति ढांचे को सुव्यवस्थित करने के लिए प्रमुख सुधारों पर भी जोर दिया। एजेंडा का एक महत्वपूर्ण बिंदु प्रशिक्षुता-सम्बन्धित शिक्षा कार्यक्रमों को बढ़ावा देना रहा। इसमें डिग्री प्रशिक्षुता, संस्था, यूजीसी और अनुबंधित कर्मचारी जैसी नई परिभाषाओं को शामिल करना शामिल था ताकि शैक्षिक पाठ्यक्रम को कार्यस्थल प्रशिक्षण आवश्यकताओं के साथ संरेखित किया जा सके। गुणवत्ता या केंद्रीय अनुमोदित पाठ्यक्रम के अनुपालन से समझौता किए बिना सीखने में लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए, इसमें नियोक्ताओं को ऑनलाइन, आभासी या मिश्रित तरीकों से बुनियादी और व्यावहारिक प्रशिक्षण देने में सक्षम बनाने का भी प्रस्ताव किया गया है।

इसके अलावा, बैठक में राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रशिक्षण योजना (एनएटीएस) के प्रशासन और पहुंच में सुधार लाने तथा प्रशिक्षुता अंतर्निहित डिग्री कार्यक्रम (एईडीपी) को विनियमित करने के लिए नए स्थानों पर क्षेत्रीय बोर्डों के गठन पर चर्चा की गई। इससे प्रशिक्षुता नियमों में एक नया खंड सम्मिलित करना आवश्यक हो गया। परिषद ने विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम के अनुरूप मानक विकलांगता वाले व्यक्ति के लिए एक परिभाषा सम्मिलित करने का प्रस्ताव देकर समावेशिता पर भी जोर दिया। परिषद ने ट्रेड या विषय क्षेत्र बेंचमार्क विकलांगता वाले व्यक्तियों के लिए अपनी उपयुक्तता निर्दिष्ट करने और तदनुसार प्रशिक्षण स्थान आरक्षित करने के सिफारिश की जिससे प्रशिक्षुता प्रशिक्षण में समान पहुंच और भागीदारी को बढ़ावा मिले। सदस्यों ने प्रशिक्षुता कार्यक्रम की प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए परिचालन और नीति-स्तर के कई मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया। प्रमुख सिफारिशों में वजीफों को तर्कसंगत बनाना शामिल था। इसमें स्थानीय जीवन-यापन लागत के अंतर को दर्शाने के लिए प्रशिक्षुता के स्थान के आधार पर वजीफे की राशि में अंतर लाने का सुझाव दिया गया था।

38वीं केंद्रीय प्रशिक्षुता परिषद बैठक में उद्योगों की मौजूदा सूची (1987 कोड) को एनआईसी कोड 2008 से जोड़कर बदलने का प्रस्ताव भी रखा गया, जिससे प्रशिक्षुता प्रशिक्षण के दायरे का विस्तार करके आईटी, सॉफ्टवेयर सेवाएं, दूरसंचार, जैव प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों को शामिल किया जा सके। औद्योगिक वर्गीकरण में भविष्य में होने वाले कोई भी अपडेट प्रशिक्षुता नियमों में स्वतः ही परिलक्षित होंगे।

सदस्यों ने अप्रेंटिसशिप इकोसिस्टम में अधिक नियोक्ताओं को लाने के लिए प्रतिष्ठान कवरेज का विस्तार करने के महत्व पर भी जोर दिया। उम्मीदवारों द्वारा अपनी अप्रेंटिसशिप को बीच में ही छोड़ देने के जोखिम को संबोधित करते हुए, परिषद ने अप्रेंटिसशिप के अवसरों को अधिक आकर्षक और फायदेमंद बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव में संरेखण सुनिश्चित करने के लिए शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस) पाठ्यक्रम और अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण को एक साथ अधिसूचित करना शामिल था। इसके अतिरिक्त, उम्मीदवारों को अधिक सुरक्षा और संरक्षण प्रदान करने के उपाय के रूप में अनुबंध अवधि के दौरान अप्रेंटिस के लिए बीमा कवरेज की आवश्यकता पर चर्चा की गई। केन्द्रीय मंत्री ने केपीएमजी की एक रिपोर्ट भी जारी की, जिसका शीर्षक है डेटा विश्लेषण रिपोर्ट: राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रोत्साहन योजना (फरवरी 2018-अप्रैल 2025), जो एनएपीएस के तहत प्रशिक्षुता प्रवृत्तियों की एक व्यापक, डेटा-संचालित समीक्षा प्रस्तुत करती है।

पिछली सीएसी बैठक जून 2021 में हुई थी। तब से, भारत के प्रशिक्षुता इको-सिस्टम ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। कक्षा में सीखने और व्यावहारिक अनुभव के एक शक्तिशाली संयोजन की पेशकश करते हुए, प्रशिक्षुता पारंपरिक डिग्री के लिए एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में उभरी है। पीएम-एनएपीएस के तहत, 19 मई 2025 तक 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 43.47 लाख से अधिक प्रशिक्षुओं को शामिल किया गया है, जिसमें 51,000 से अधिक प्रतिष्ठानों की भागीदारी है। उल्लेखनीय रूप से, महिलाओं की भागीदारी 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है, और इसे और बढ़ाने के लिए केंद्रित प्रयास चल रहे हैं। साथ ही, स्नातक और डिप्लोमा धारकों के उद्देश्य से एनएटीएस योजना भी लगातार बढ़ी है – अकेले वित्त वर्ष 2024-25 में 5.23 लाख से अधिक प्रशिक्षुओं को नामांकित किया गया है।

परिषद में केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, उद्योग (सार्वजनिक और निजी), शिक्षाविदों, श्रम निकायों और तकनीकी विशेषज्ञों के प्रतिनिधि शामिल हैं। उल्लेखनीय सदस्यों में बीएचईएल, इंडियन ऑयल, टाटा समूह, मारुति सुजुकी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एनएसडीसी, यूजीसी, एआईसीटीई के अध्यक्ष और शिक्षा, श्रम, एमएसएमई, रेलवे और कपड़ा जैसे मंत्रालयों के वरिष्ठ नौकरशाह शामिल हैं। दस प्रमुख राज्यों के राज्य प्रशिक्षु सलाहकार और शिक्षा, श्रम और उद्योग में अनुभव रखने वाले डोमेन विशेषज्ञ भी परिषद में काम करते हैं। बैठक के परिणाम स्वरूप भारत में प्रशिक्षुता और कौशल सुधारों की अगली लहर के सफल रहने की उम्मीद है और यह ‘कुशल भारत, विकसित भारत’ के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप होगी।

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