विन न्यूज़ नेटवर्क। भारत में रहने वाले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए छह गैर-मुस्लिम समुदायों के लोगों को लेकर केंद्र सरकार ने इमिग्रेशन नियमों में संशोधन किया है। नए आदेश के मुताबिक, हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के कुछ ऐसे लोगों को अब भारत में रहने के लिए वीजा लेना होगा, जिन्हें पहले पासपोर्ट और वीजा की अनिवार्यता से छूट मिली हुई थी।
यह प्रावधान 31 दिसंबर 2024 या उससे पहले भारत आए लोगों से संबंधित है। इसमें बिना वैध यात्रा दस्तावेजों के आए लोग और जिनके दस्तावेजों की अवधि समाप्त हो चुकी है, वे भी शामिल हैं।
गृह मंत्रालय ने गुरुवार को इमिग्रेशन नियमों में संशोधन की अधिसूचना जारी की है। नए आदेश में पाकिस्तानी नागरिकों, भारतीय मूल के कुछ विदेशी नागरिकों और भारत, नेपाल तथा भूटान के बीच यात्रा करने वालों के लिए भी कई बदलाव किए गए हैं।
- पाकिस्तानी नागरिकों को पासपोर्ट नवीनीकरण में राहत
नए नियमों के तहत 31 दिसंबर 2009 या उससे पहले भारत आए कुछ पाकिस्तानी नागरिकों को पासपोर्ट रिन्यू कराने की अनिवार्यता से छूट दी गई है। यह राहत उन लोगों के लिए है, जो स्थायी रूप से भारत में बस गए हैं और पाकिस्तानी राष्ट्रीय पहचान पत्र (CNIC) नहीं होने के कारण पासपोर्ट का नवीनीकरण नहीं करा पा रहे हैं। हालांकि, इसके लिए उन्हें निर्धारित शर्तें पूरी करनी होंगी। इनमें दोबारा पाकिस्तान नहीं लौटने का लिखित आश्वासन देना भी शामिल है।
- मलेशिया और सिंगापुर के भारतीय मूल के लोगों को राहत
मलेशिया और सिंगापुर की नागरिकता हासिल कर चुके कुछ भारतीय मूल के लोगों को भी नए आदेश में राहत दी गई है। 31 दिसंबर 2009 या उससे पहले इन देशों के पासपोर्ट पर भारत आए ऐसे लोगों को पासपोर्ट नवीनीकरण से छूट मिल सकती है, जिनके दस्तावेज समाप्त हो चुके हैं और संबंधित देशों के नियमों के कारण उनका नवीनीकरण संभव नहीं है। हालांकि, इस छूट से पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, अफगानिस्तान, भूटान, नेपाल और चीन के नागरिक बाहर रहेंगे।
- भारत-नेपाल-भूटान यात्रा के नियम हुए स्पष्ट
भारत, नेपाल और भूटान के नागरिकों को एक-दूसरे के देशों में सीधे आने-जाने के लिए पासपोर्ट और वीजा से छूट का प्रावधान बरकरार रखा गया है। नए संशोधन में पहचान पत्रों और इमिग्रेशन जांच से जुड़े नियम स्पष्ट किए गए हैं। जरूरत पड़ने पर अधिकारी अतिरिक्त जानकारी भी मांग सकेंगे।
हालांकि, यदि भारतीय नागरिक नेपाल या भूटान के रास्ते किसी तीसरे देश से यात्रा करते हैं, तो उन्हें निर्धारित इमिग्रेशन नियमों के अनुसार वैध पासपोर्ट और प्रवेश-निकास प्रक्रिया का पालन करना होगा। चीन, मकाऊ, हांगकांग या पाकिस्तान से यात्रा करने वाले नेपाल और भूटान के नागरिकों के लिए भी पासपोर्ट और वीजा की शर्त लागू होगी।
- श्रीलंकाई तमिलों और तिब्बतियों को पुरानी छूट जारी
नए आदेश में श्रीलंकाई तमिलों और कुछ तिब्बती नागरिकों को पहले से मिल रही राहत बरकरार रखी गई है। 9 जनवरी 2015 या उससे पहले भारत में शरण लेने वाले पंजीकृत श्रीलंकाई तमिलों को सामान्य पासपोर्ट और वीजा नियमों से छूट जारी रहेगी।
इसी तरह 1959 से 30 मई 2003 के बीच काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास से परमिट लेकर भारत आए कुछ तिब्बतियों को भी राहत मिलेगी। इसके अलावा निर्धारित सीमा चौकियों से विशेष परमिट लेकर आने वाले तिब्बतियों के लिए पंजीकरण और प्रमाणपत्र की शर्त लागू रहेगी।
- सेना और विदेशी सैन्य जहाजों के लिए भी प्रावधान
संशोधित इमिग्रेशन आदेश में सेना के जवानों और विदेशी सैन्य जहाजों के कर्मचारियों से संबंधित छूट के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। इसका उद्देश्य सैन्य गतिविधियों और निर्धारित आधिकारिक यात्राओं के दौरान लागू प्रवेश संबंधी नियमों को स्पष्ट करना है।
CAA और नए इमिग्रेशन आदेश में क्या है अंतर?
नागरिकता संशोधन कानून (CAA), 2019 और इमिग्रेशन आदेश, 2026 का संबंध पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए छह गैर-मुस्लिम समुदायों से है। हालांकि, दोनों के उद्देश्य अलग-अलग हैं। CAA पात्र लोगों को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने का रास्ता देता है, जबकि इमिग्रेशन आदेश पासपोर्ट और वीजा संबंधी छूट तथा यात्रा नियमों को निर्धारित करता है। इसलिए दोनों को एक जैसा समझना सही नहीं होगा।