विन न्यूज़ नेटवर्क। फ्रांस में बढ़ती महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी समस्याओं के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों के बीच भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। दूतावास ने फ्रांस में रह रहे भारतीयों और वहां घूमने जाने वाले लोगों से सतर्क रहने, प्रदर्शन वाले इलाकों से दूर रहने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
यह एडवाइजरी ऐसे समय जारी की गई है, जब देश के कई हिस्सों में हिंसक झड़पों के बाद कर्फ्यू लगाया गया है और 24 अक्टूबर को नए प्रदर्शनों की तैयारी चल रही है।
भारतीय दूतावास ने क्या दी सलाह?
पेरिस स्थित भारतीय दूतावास ने 21 अक्टूबर को जारी परामर्श में कहा कि फ्रांस में हालात को देखते हुए भारतीय नागरिक अतिरिक्त सावधानी बरतें। उन्हें उन स्थानों पर जाने से बचना चाहिए, जहां प्रदर्शन हो रहे हैं या बड़ी संख्या में लोग जमा हैं। इसके साथ ही फ्रांस के स्थानीय अधिकारियों की ओर से जारी निर्देशों और सुरक्षा संबंधी सूचनाओं का पालन करने की सलाह दी गई है।
दूतावास ने भारतीय नागरिकों से स्थानीय समाचारों और आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखने को भी कहा है। प्रदर्शन के कारण अलग-अलग शहरों में सार्वजनिक परिवहन सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में यात्रा से पहले बस, रेल और अन्य परिवहन सेवाओं की स्थिति की जानकारी लेना जरूरी है।
आपात स्थिति में भारतीय नागरिक पेरिस स्थित भारतीय दूतावास से फोन नंबर +33 6 48 34 00 63 पर संपर्क कर सकते हैं। ईमेल के माध्यम से भी सहायता मांगी जा सकती है।
24 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले सुरक्षा बढ़ाने की तैयारी
फ्रांस में 24 अक्टूबर को एक बार फिर बड़े प्रदर्शन होने की संभावना है। इसे देखते हुए सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी की है। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने आगामी प्रदर्शनों के दौरान बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों की तैनाती के संकेत दिए हैं।
सरकार का उद्देश्य प्रदर्शन के दौरान हिंसा, आगजनी और लूटपाट जैसी घटनाओं को रोकना है। इससे पहले हुए प्रदर्शनों में कई शहरों में हालात बिगड़ गए थे। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों के बाद सार्वजनिक संपत्तियों और दुकानों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई थीं।
2,500 से अधिक लोगों को हिरासत में लेने की खबर
17 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों के बाद फ्रांस में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर हिंसा हुई और 2,500 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने भी स्वीकार किया कि प्रशासन हिंसा की गंभीरता का सही आकलन नहीं कर पाया था और कुछ शहरों में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई थी।
लिमोज शहर में ऐतिहासिक टाउन हॉल में आग लगाए जाने और कई दुकानों में लूटपाट की घटनाओं की जानकारी सामने आई। हिंसा के बाद पेरिस के कुछ हिस्सों सहित लियोन और अन्य शहरों में रात के समय कर्फ्यू जैसी पाबंदियां लागू की गईं।
महंगाई और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन
फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के खिलाफ हुई थी। छात्रों और शिक्षकों ने स्कूलों की खराब इमारतों, शिक्षकों की कमी, कक्षाओं में अधिक विद्यार्थियों और पढ़ाई के बढ़ते दबाव जैसे मुद्दे उठाए थे।
बाद में आंदोलन का दायरा बढ़ा और इसमें महंगाई, ईंधन की बढ़ती कीमतों तथा सार्वजनिक सेवाओं में कटौती को लेकर नाराज लोग भी शामिल हो गए। विभिन्न संगठनों और श्रमिक समूहों की भागीदारी से विरोध तेज होता गया।
मैक्रों ने हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि सरकार लोगों की जायज चिंताओं को सुनेगी, लेकिन हिंसा और तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है- प्रदर्शनकारियों की मांगों पर ध्यान देना और सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखना।
फिलहाल फ्रांस जाने या वहां मौजूद भारतीय नागरिकों के लिए जरूरी है कि वे स्थानीय प्रशासन की सूचनाओं पर नजर रखें, प्रदर्शन वाले इलाकों से दूरी बनाए रखें और यात्रा से पहले परिवहन सेवाओं की स्थिति की पुष्टि करें।