विन न्यूज़ नेटवर्क। दिल्ली में एक नाबालिग बच्ची से यौन अपराध के मामले में सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट की जज ने फैसला सुनाने के साथ बच्ची के लिए एक खास संदेश भी लिखा। अब दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि जज का यह संदेश बच्ची या उसके परिवार तक पहुंचाया जाए। हाईकोर्ट ने इसे बच्ची के लिए हौसला बढ़ाने वाला संदेश बताया है।
जज ने बच्ची की हिम्मत को सराहा
रोहिणी की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजनी रंगा ने अपने फैसले के अंत में बच्ची को संबोधित करते हुए उसके साहस की सराहना की। जज ने लिखा कि बच्ची ने कोर्ट में आकर आरोपी की पहचान की और पूरी बात बताने की हिम्मत दिखाई। उसने चुप रहने के बजाय अपनी मां को घटना के बारे में बताया, जिसके बाद आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकी।
जज ने बच्ची से कहा कि, “अदालत उसका बचपन वापस तो नहीं ला सकती, लेकिन उसके शब्दों को सुना गया है और उसकी हिम्मत को हमेशा याद रखा जाएगा”।
बच्ची ने कहा था- अंकल को बूढ़ा होने तक जेल में रखें
यह मामला 23 जुलाई 2023 का है। उस समय बच्ची सात साल की थी। मामले में आरोपी वह व्यक्ति था, जिसे बच्ची ‘अंकल’ कहती थी। सुनवाई के दौरान बच्ची ने अदालत से कहा था कि उसे तब तक जेल में रखा जाए, जब तक वह बूढ़ा न हो जाए।
जज ने अपने संदेश में इसी बात का जिक्र करते हुए बताया कि अदालत ने उसकी बात सुनी और आरोपी को प्राकृतिक जीवन के बाकी समय तक जेल की सजा सुनाई गई है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने DLSA को दिए निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की पीठ ने 22 सितंबर को निर्देश दिया कि उत्तर-पश्चिम दिल्ली जिला विधिक सेवा प्राधिकरण यानी DLSA जज के संदेश को प्रिंट कर बच्ची या उसके परिवार को उपलब्ध कराए। यह प्रक्रिया दो सप्ताह के भीतर पूरी करने को कहा गया है। कोर्ट ने मुआवजे की स्थिति पर भी DLSA से रिपोर्ट मांगी है।
आरोपी को प्राकृतिक जीवन तक जेल की सजा
ट्रायल कोर्ट ने आरोपी सुमित शक्य को 12 साल से कम उम्र की बच्ची के खिलाफ गंभीर यौन अपराध के मामले में POCSO कानून के तहत प्राकृतिक जीवन के बाकी समय तक कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। आपराधिक धमकी के मामले में पांच साल की कठोर कैद और 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। दोनों सजाएं साथ चलने का आदेश दिया गया है।
बच्ची को 10.50 लाख रुपये मुआवजा
अदालत ने बच्ची के लिए 10.50 लाख रुपये का मुआवजा भी तय किया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने DLSA से पूछा है कि मुआवजे की रकम के भुगतान की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है। इस मामले में आरोपी की सजा पर रोक लगाने की मांग पर भी हाईकोर्ट ने फिलहाल राहत नहीं दी।