विन न्यूज़ नेटवर्क। राजस्थान के डीडवाना जिले में प्रशासन ने सोमवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए हिस्ट्रीशीटर दिनेश स्वामी से जुड़े मकान के कथित अवैध हिस्से को बुलडोजर से हटाया। यह अभियान पुलिस और नगर परिषद की संयुक्त टीम ने चलाया।
अधिकारियों के मुताबिक, जांच में पाया गया कि मकान का एक हिस्सा निर्धारित पट्टे की सीमा से बाहर बनाकर सार्वजनिक रास्ते की जमीन पर निर्माण किया गया था। प्रशासन का कहना है कि नियमानुसार प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई।
करीब 19 गज जमीन पर अतिक्रमण का दावा
नगर परिषद के अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान मकान के लगभग 19 गज हिस्से को अवैध निर्माण की श्रेणी में पाया गया। आरोप है कि यह हिस्सा सरकारी भूमि और सार्वजनिक मार्ग पर बनाया गया था।
अतिक्रमण की पुष्टि होने के बाद संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किया गया था। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद नगर परिषद ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की।
बुलडोजर से हटाया गया अवैध निर्माण
कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने मकान के उसी हिस्से को हटाया जिसे अवैध बताया गया। बुलडोजर की मदद से मुख्य प्रवेश द्वार की दीवार, बाथरूम, शौचालय और पानी की टंकी (हौद) को तोड़ा गया।
अधिकारियों का कहना है कि पूरी कार्रवाई केवल उसी हिस्से तक सीमित रही जो जांच में अतिक्रमण के दायरे में पाया गया था।
परिजनों ने जताया विरोध
ध्वस्तीकरण के दौरान दिनेश स्वामी के परिवार ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया। उनके पिता का कहना था कि मकान उनके नाम पर है और इसका उनके बेटे के आपराधिक मामलों से कोई संबंध नहीं है।
वहीं, उनकी मां और बहन ने भी कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए प्रशासन के फैसले का विरोध किया। हालांकि मौके पर तैनात पुलिस बल ने स्थिति को नियंत्रित रखा और किसी भी अप्रिय घटना को होने से रोक दिया।
पुलिस ने सुरक्षा के बीच पूरी की कार्रवाई
कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे। प्रशासन ने पहले से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की थी ताकि विरोध के बावजूद कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।
पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में नगर परिषद की टीम ने तय प्रक्रिया के अनुसार अतिक्रमण हटाने का अभियान पूरा किया।
कौन है दिनेश स्वामी?
पुलिस के अनुसार, दिनेश स्वामी डीडवाना थाना क्षेत्र का हिस्ट्रीशीटर है। उसके खिलाफ विभिन्न मामलों में 25 से अधिक आपराधिक प्रकरण दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
हाल ही में महिलाओं से लूट की दो घटनाओं में उसकी गिरफ्तारी के बाद जिला प्रशासन ने उसकी संपत्तियों की जांच कराई थी। इसी जांच के दौरान संबंधित मकान में कथित अतिक्रमण सामने आने का दावा किया गया।
जांच के बाद हुई प्रशासनिक कार्रवाई
प्रशासन का कहना है कि संपत्ति की जांच पूरी होने के बाद नगर परिषद ने नियमानुसार नोटिस जारी किया था। नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए अवैध निर्माण हटाया गया।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई किसी व्यक्ति के आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर नहीं, बल्कि अतिक्रमण संबंधी जांच और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर की गई।
फिलहाल प्रशासन इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों और रिकॉर्ड की समीक्षा कर रहा है। यदि संबंधित पक्ष कार्रवाई को चुनौती देना चाहता है, तो उसके पास कानून के तहत उचित मंच पर अपील करने का अधिकार उपलब्ध है।