मध्य पूर्व में चल रहा सैन्य संघर्ष अब उन पड़ोसी देशों तक भी फैल गया है जो सीधे तौर पर इस जंग का हिस्सा नहीं थे. शुक्रवार यानि आज को कुवैत की प्रसिद्ध मीना अल-अहमदी रिफाइनरी पर ड्रोन के जरिए हमला किया गया. कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन ने आधिकारिक बयान में बताया कि इस हमले के कारण रिफाइनरी की कई इकाइयों में आग लग गई है. राहत की बात यह है कि इस घटना में अब तक किसी व्यक्ति के घायल होने की खबर नहीं मिली है. वहां की फायरफाइटिंग टीमें और इमरजेंसी यूनिट्स आग को बुझाने और उसे दूसरे हिस्सों में फैलने से रोकने के लिए लगातार काम कर रही हैं.
इस तनावपूर्ण माहौल के बीच कूटनीतिक हलचल भी तेज हो गई है. बहरीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक मसौदा पेश किया है. इस प्रस्ताव में मांग की गई है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए देशों को सभी जरूरी रक्षात्मक कदम उठाने की छूट दी जाए. जानकारों का मानना है कि इस प्रस्ताव पर आज ही मतदान हो सकता है. ऐसी खबरें भी हैं कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच हुई बातचीत के बाद रूस इस प्रस्ताव का विरोध नहीं करेगा. इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को सुरक्षित करने की कोशिशों को बल मिल सकता है.
सुरक्षा के मोर्चे पर बहरीन ने हाल ही में अपने देश की टेलीकॉम कंपनी बटेलको के मुख्यालय पर हुए हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए इसे अमेज़न के डेटा सेंटर पर हमला बताया था, जिसे बहरीन ने अपनी संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया है. वहीं दूसरी तरफ, दुबई मीडिया ऑफिस ने सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों का खंडन किया है जिनमें दुबई के ओरेकल डेटा सेंटर पर हमले की बात कही जा रही थी. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ये खबरें पूरी तरह से झूठी हैं और लोगों को अफवाहों से बचना चाहिए.
युद्ध के बढ़ते दायरे को देखते हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने एक बड़ा सुरक्षा निर्णय लिया है. यूएई ने ईरानी नागरिकों के देश में प्रवेश और यहां से होकर दूसरे देशों में जाने (ट्रांजिट) पर पूरी तरह रोक लगा दी है. एमिरेट्स और एतिहाद जैसी बड़ी एयरलाइनों ने अपनी वेबसाइट पर इस नए नियम की जानकारी साझा की है. यह प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है. इस कदम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच अपनी आंतरिक सुरक्षा को मजबूत बनाए रखना है.
विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक और तकनीकी बुनियादी ढांचों को निशाना बनाना इस संघर्ष का एक खतरनाक मोड़ है. हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल व्यापार का एक बहुत ही महत्वपूर्ण रास्ता है और वहां सुरक्षा परिषद का कोई भी निर्णय वैश्विक बाजार पर बड़ा असर डालेगा. कुवैत में तेल रिफाइनरी पर हुआ हमला और खाड़ी देशों द्वारा उठाए जा रहे सख्त कदम यह साफ संकेत देते हैं कि आने वाले दिनों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी की जा सकती है.