इस्लामाबाद और वाशिंगटन के बीच बढ़ता तनाव
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर पिछले कुछ समय से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपने संबंधों को सुधारने और वाशिंगटन के करीब आने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। लेकिन, 25 मार्च 2026 को अमेरिकी कांग्रेस द्वारा जारी एक विस्फोटक रिपोर्ट ने पाकिस्तान के इन कूटनीतिक प्रयासों को बड़ा झटका दिया है। इस रिपोर्ट ने दुनिया के सामने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पाकिस्तान अपनी सरजमीं पर आतंकवाद को न केवल पनाह दे रहा है, बल्कि उसे सरकारी संरक्षण में ‘एक्सपोर्ट’ भी कर रहा है।
14 आतंकी संगठनों की सक्रिय मौजूदगी
अमेरिकी कांग्रेस की इस विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की धरती पर इस समय कम से कम 14 अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय आतंकी संगठन सक्रिय रूप से फल-फूल रहे हैं। इनमें भारत विरोधी खतरनाक गुट जैसे लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और हिजबुल मुजाहिद्दीन प्रमुख हैं। रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा किया गया है कि वैश्विक आतंकी संगठन अल-कायदा और ‘इस्लामिक स्टेट खोरासान’ (ISKP) के 4,000 से 6,000 आतंकी आज भी पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमाई इलाकों से अपना नेटवर्क संचालित कर रहे हैं। पाकिस्तान भले ही ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद इन संगठनों पर प्रतिबंध का दावा करता रहा हो, लेकिन हकीकत में लश्कर के 1,000 और जैश के 500 से ज्यादा प्रशिक्षित आतंकी वहां आज भी मौजूद हैं।
पहचान पत्र (CNIC) से बेनकाब हुआ झूठ
पाकिस्तान की बेशर्मी का सबसे बड़ा उदाहरण हाल ही में किश्तवाड़ में हुई एक मुठभेड़ के बाद देखने को मिला। भारतीय सेना द्वारा मारे गए जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकियों को पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने ‘भारतीय नागरिक’ और ‘स्वतंत्रता सेनानी’ करार दिया था। हालांकि, जांच में मारे गए आतंकी अतीक-उर-रहमान उर्फ सैफुल्लाह का पाकिस्तानी राष्ट्रीय पहचान पत्र बरामद हुआ। यह कार्ड साफ तौर पर साबित करता है कि सैफुल्लाह पाकिस्तान के एबटाबाद का निवासी था और उसका पूरा परिवार आज भी वहीं रहता है। यह दस्तावेज पाकिस्तान के उस सफेद झूठ को पूरी तरह ध्वस्त करता है जिसे वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेचता रहा है।
1970 से जारी आतंक का संरक्षण
रिपोर्ट में इस बात को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है कि पाकिस्तान की आतंकवाद परस्ती कोई नई घटना नहीं है। साल 1970 के दशक से ही पाकिस्तानी संस्थाएं (Establishment) अपने देश में आतंकियों को तैयार कर उन्हें भारत में अस्थिरता फैलाने के लिए भेज रही हैं। ‘ऑपरेशन महादेव’ और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी भारतीय सेना की सफल कार्रवाइयों में मारे गए आतंकियों के पास से मिले पाकिस्तानी दस्तावेज और फैमिली रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (FRC) इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय दुनिया को बरगलाने के लिए लगातार झूठे बयान जारी करता है।
वैश्विक कूटनीति पर असर
अमेरिकी कांग्रेस की इस रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि अब दुनिया पाकिस्तान के ‘विक्टिम कार्ड’ या उसके खोखले दावों पर यकीन करने को तैयार नहीं है। ट्रंप प्रशासन के आने के बाद आतंकवाद के प्रति अमेरिका का रवैया और सख्त हुआ है। रिपोर्ट आने के बाद पाकिस्तान की आर्थिक और सामरिक स्थिति और भी नाजुक हो सकती है, क्योंकि यह सीधे तौर पर उसकी ‘ग्रे लिस्ट’ या अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की संभावनाओं को बढ़ा देता है। कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट पाकिस्तान के लिए एक कड़ा संदेश है कि वह अपनी सरजमीं से आतंक की खेती बंद करे, अन्यथा उसे वैश्विक स्तर पर और भी कड़े झटकों के लिए तैयार रहना होगा।