पटना, मार्च 2026 बिहार की राजधानी पटना इन दिनों एक नई सियासी हलचल का केंद्र बन गई है। शहर के प्रमुख चौराहों, गंगा मैदान के आसपास और व्यस्त इलाकों में लगे रंग-बिरंगे पोस्टरों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बाजार गर्म कर दिया है। इन पोस्टरों पर लिखा है ‘ना दंगा हो ना फसाद हो, बिहार का सीएम सिर्फ चिराग हो।’ इसके अलावा ‘मोदी जी को मिला अपने हनुमान को आशीर्वाद’ और ‘चिराग होंगे बिहार के नए सरताज’ जैसे नारों ने आम जनता और राजनीतिक हलकों में खूब ध्यान खींचा है।
नीतीश के विकल्प के तौर पर उभर रहा चिराग का नाम
पटना में लगे इन पोस्टरों की यह लहर ऐसे वक्त में आई है जब नीतीश कुमार के राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के समर्थक और स्थानीय कार्यकर्ता खुलकर चिराग पासवान को बिहार के अगले मुख्यमंत्री के रूप में पेश कर रहे हैं। एक पोस्टर में साफ लिखा है ‘मोदी जी के आशीर्वाद से चिराग बिहार के नए सरताज बनेंगे।’ यह नारा न केवल चिराग की प्रधानमंत्री मोदी के प्रति गहरी निष्ठा को दर्शाता है बल्कि बिहार की जनता के बीच उनकी बढ़ती स्वीकार्यता का भी संकेत देता है।
गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में पटना में ऐसे पोस्टर कई बार लग चुके हैं, खासकर नीतीश कुमार की शपथ या चुनावी मौकों पर। लेकिन इस बार यह मांग पहले से कहीं ज्यादा मुखर और संगठित नजर आ रही है।
2025 चुनाव में लोजपा ने दिखाई थी ताकत
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान की पार्टी LJP (रामविलास) ने NDA गठबंधन के तहत 29 सीटों पर चुनाव लड़ा और 19 सीटें जीतकर बिहार विधानसभा में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। इस प्रदर्शन ने चिराग को एनडीए के भीतर एक अहम और प्रभावशाली चेहरे के रूप में स्थापित कर दिया। उनकी यह सियासी ताकत ही अब पोस्टरों के जरिए सड़कों पर उतर आई है।
कौन हैं चिराग पासवान?
31 अक्टूबर 1982 को जन्मे चिराग पासवान बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी हैं। वे दिवंगत दिग्गज नेता रामविलास पासवान के पुत्र हैं और फिलहाल लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। राजनीति में आने से पहले वे बॉलीवुड में भी अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। वर्तमान में वे केंद्र सरकार में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हैं और 2024 से हाजीपुर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
चिराग खुद को प्रधानमंत्री मोदी का ‘हनुमान’ कहते हैं और उनकी यह निष्ठा उन्हें NDA में एक विश्वसनीय और भरोसेमंद सहयोगी बनाती है। संसद में लोकसभा के 5 सांसदों के साथ पार्टी की मौजूदगी उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रासंगिक बनाए रखती है।
युवा चेहरा, दलित ताकत और विकास की बात
पटना की सड़कों पर लगे ये पोस्टर सिर्फ एक सियासी अभियान नहीं हैं, बल्कि ये बिहार में युवा नेतृत्व की बढ़ती मांग और पासवान समुदाय की संगठित ताकत का प्रतीक हैं। चिराग का युवा और ऊर्जावान चेहरा, मोदी के प्रति अटूट समर्पण और विकास की बातें उन्हें खासकर युवाओं और दलित वोटर्स के बीच तेजी से लोकप्रिय बना रही हैं।
अब सवाल यह है कि क्या ये पोस्टर महज समर्थकों का जोश हैं या बिहार की राजनीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत? नीतीश कुमार के राजनीतिक भविष्य पर जैसे-जैसे अनिश्चितता बढ़ेगी, चिराग पासवान की दावेदारी और मजबूत होती जाएगी। बिहार का सियासी मंच एक नए और रोमांचक मोड़ पर खड़ा है।