महाराष्ट्र की प्रशासनिक व्यवस्था में पिछले कुछ महीनों से एक नया बदलाव तेजी से चर्चा में है। मुंबई उपनगर जिले के कलेक्टर के रूप में नियुक्त युवा आईएएस अधिकारी सौरभ कटियार ने सरकारी सेवाओं को आधुनिक और तेज बनाने के लिए जो कदम उठाए हैं, उन्हें प्रशासनिक सुधार का प्रभावी उदाहरण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा उन्हें अमरावती से मुंबई बुलाकर जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद उन्होंने केवल नौ महीनों में ही कार्यप्रणाली में बड़ा परिवर्तन कर दिया।
मुंबई उपनगर देश के सबसे घनी आबादी वाले जिलों में से एक है, जहां रोज लाखों लोग जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, आय-निवास प्रमाणपत्र, जमीन रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेजों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते थे। लंबी कतारें, देरी और बार-बार कार्यालय आने की मजबूरी नागरिकों के लिए बड़ी समस्या थी। इस स्थिति को देखते हुए कटियार ने “मॉडर्न सेतु” नाम से एक व्यापक सेवा वितरण प्रणाली लागू की।
यह पहल पारंपरिक कार्यालय व्यवस्था को डिजिटल और हाई-परफॉर्मेंस गवर्नेंस मॉडल में बदलने के उद्देश्य से शुरू की गई। इसमें कॉर्पोरेट-स्तर के इंफ्रास्ट्रक्चर को व्हाट्सऐप ऑटोमेशन, ऑनलाइन आवेदन और मोबाइल सेतु आउटरीच जैसे तकनीकी समाधानों के साथ जोड़ा गया। अब नागरिक कई सेवाओं के लिए घर बैठे आवेदन कर सकते हैं और उन्हें कार्यालय जाने की जरूरत कम पड़ती है। इससे समय और खर्च दोनों की बचत हो रही है।
इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसकी पहुँच है। जिन लोगों के पास इंटरनेट या कंप्यूटर की सुविधा नहीं है, उनके लिए मोबाइल सेतु टीम विभिन्न क्षेत्रों में जाकर मौके पर ही सेवाएं उपलब्ध कराती है। इससे बुजुर्ग, दिव्यांग और कामकाजी लोगों को विशेष लाभ मिला है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से शिकायतों की संख्या भी घटी है और पारदर्शिता बढ़ी है।
कटियार को यह जिम्मेदारी इसलिए भी मिली क्योंकि उन्होंने अमरावती में अपने कार्यकाल के दौरान प्रशासनिक गतिमानता पुरस्कार हासिल किया था। उनकी कार्यशैली तेज निर्णय, तकनीक का उपयोग और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण पर आधारित रही है। मुंबई में उन्होंने एक और महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है—एक वर्ष में 500 एकड़ सरकारी जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराना। इस जमीन पर भविष्य में सार्वजनिक सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो सौरभ कटियार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के रहने वाले हैं। वे छात्र जीवन से ही मेधावी रहे हैं और यूपी बोर्ड की 12वीं परीक्षा में प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त किया था। बाद में उन्होंने आईआईटी कानपुर से बीटेक और एमटेक किया और यूपीएससी परीक्षा में 334वीं रैंक हासिल कर आईएएस बने। इससे पहले वे आईआरएस के रूप में प्रशिक्षण ले रहे थे।
आज मुंबई में उनका डिजिटल प्रशासन मॉडल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह तकनीक आधारित सेवाएं लागू की जाएं तो आम जनता को सरकारी कामों में लगने वाला समय और परेशानी काफी कम हो सकती है। कटियार की पहल प्रशासन को अधिक उत्तरदायी और नागरिक-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।