तमिलनाडु में आगामी चुनावों से पहले मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए ‘कलाइग्नार योजना’ के तहत राज्य की 1.3 करोड़ महिलाओं को 5,000 रुपये देने की घोषणा की है। यह कदम चुनावी माहौल में महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता देने के रूप में देखा जा रहा है, जो राज्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाती हैं।
महिलाओं से किया वादा, सरकार नहीं हटेगी पीछे
स्टालिन ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह तमिलनाडु की महिलाओं से किया गया उनका वादा है और इसे कोई भी नहीं रोक सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव का बहाना बनाकर तीन महीने तक राशि रोकने की कोशिश की जा रही है, लेकिन उनकी सरकार किसी भी दबाव में झुकने वाली नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिलाओं के अधिकार और सम्मान से समझौता नहीं किया जाएगा और सरकार तय समय पर यह राशि वितरित करेगी।
क्या है ‘कलाइग्नार योजना’?
‘कलाइग्नार’ नाम पूर्व मुख्यमंत्री और द्रमुक के वरिष्ठ नेता एम. करुणानिधि की स्मृति से जुड़ा है। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
सरकार का दावा है कि यह सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
राजनीतिक मायने
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घोषणा चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा है। तमिलनाडु में महिला मतदाता बड़ी संख्या में हैं और कई चुनावों में उनकी भागीदारी निर्णायक रही है।
विपक्ष ने इस घोषणा को “चुनावी स्टंट” करार दिया है और आरोप लगाया है कि राज्य सरकार मतदाताओं को लुभाने के लिए खजाने पर बोझ डाल रही है। वहीं सत्तारूढ़ दल का कहना है कि यह जनकल्याणकारी योजना है और पहले से किए गए वादों का विस्तार मात्र है।
आर्थिक असर
यदि 1.3 करोड़ महिलाओं को 5,000 रुपये दिए जाते हैं, तो कुल व्यय लगभग 6,500 करोड़ रुपये से अधिक होगा। ऐसे में राज्य की वित्तीय स्थिति और बजट संतुलन पर भी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि सरकार का कहना है कि यह राशि सामाजिक सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण के लिए आवश्यक निवेश है।
चुनाव नजदीक आते ही इस योजना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है। अब देखना यह होगा कि चुनाव आयोग की आचार संहिता और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बीच यह योजना किस समय और किस रूप में लागू होती है।
तमिलनाडु की राजनीति में यह घोषणा एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है, खासकर तब जब महिला मतदाताओं का समर्थन किसी भी दल के लिए सत्ता की चाबी बन सकता है।