केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए अहम खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इससे लाखों कर्मचारियों में वेतन बढ़ोतरी को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं। यदि आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाती हैं और उनका वास्तविक क्रियान्वयन 2027 में होता है, तो कर्मचारियों को एकमुश्त एरियर के रूप में बड़ी राशि मिल सकती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अलग-अलग पे-लेवल के कर्मचारियों को कितना लाभ हो सकता है और एरियर की गणना कैसे की जाएगी।
सरकार ने 3 नवंबर 2025 को एक आधिकारिक संकल्प जारी कर 8वें वेतन आयोग के गठन की घोषणा की। राज्यसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लिखित उत्तर में इसकी जानकारी दी। अधिसूचना गजट ऑफ इंडिया में प्रकाशित हो चुकी है, जिससे आयोग औपचारिक रूप से अस्तित्व में आ गया है। यह आयोग लगभग दस साल बाद गठित हुआ है, क्योंकि 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें 2016 से लागू थीं। नए आयोग की सिफारिशों का असर केंद्रीय कर्मचारियों, रक्षा सेवाओं के कर्मियों, ऑल इंडिया सर्विसेज के अधिकारियों और पेंशनरों पर पड़ेगा।
संकेत मिल रहे हैं कि आयोग की सिफारिशों को 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जा सकता है, हालांकि व्यावहारिक रूप से इन्हें 2027 में लागू किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो कर्मचारियों को कम से कम 12 से 15 महीनों का एरियर मिल सकता है। अगर लागू करने में और देरी होती है, तो यह अवधि 20 महीनों तक भी पहुंच सकती है। इसका मतलब यह है कि पुराने और नए वेतन के बीच का अंतर लागू होने की तारीख तक एकमुश्त भुगतान के रूप में दिया जाएगा।
फिटमेंट फैक्टर को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि इसे 2.57 के आसपास रखा जा सकता है, जैसा 7वें वेतन आयोग में था। यदि ऐसा होता है तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में लगभग 30 से 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी संभव है। उदाहरण के तौर पर, लेवल-1 के कर्मचारी को लगभग 3.5 लाख से 5.5 लाख रुपये तक एरियर मिल सकता है। लेवल-2 के कर्मचारियों के लिए यह अनुमान 4 लाख से 6 लाख रुपये के बीच हो सकता है। वहीं लेवल-4 के कर्मचारियों को 5 लाख से 8 लाख रुपये या उससे अधिक का एरियर मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अंतिम आंकड़े आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेंगे।
एरियर की गणना का तरीका अपेक्षाकृत सरल है। सबसे पहले पुराने और संशोधित बेसिक वेतन के बीच का अंतर निकाला जाता है। फिर इस अंतर को उन महीनों की संख्या से गुणा किया जाता है, जिनके लिए एरियर देय है। इसके साथ ही महंगाई भत्ता (डीए) का अंतर भी जोड़ा जाता है, क्योंकि डीए बेसिक वेतन के प्रतिशत के रूप में दिया जाता है। नई बेसिक सैलरी बढ़ने से डीए की राशि भी बढ़ेगी, जिससे कुल एरियर और ज्यादा हो जाएगा।
लंबे समय से वेतन संशोधन की मांग कर रहे कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए यह एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन लागत के बीच वेतन पुनरीक्षण की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। हालांकि आयोग की अंतिम सिफारिशें आने और उन्हें लागू करने में अभी समय लगेगा, लेकिन इसके गठन से यह स्पष्ट हो गया है कि प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आयोग कब अपनी रिपोर्ट सौंपता है और सरकार उसे किस समय से लागू करती है।