आपातकाल के 50 साल- मोदी सहित पूरी कैबिनेट ने रखा मौन :PM ने लिखा- कांग्रेस ने लोकतंत्र को किया कैद, खड़गे का जवाब- ये झूठ छिपाने का नाटक

उधर इमरजेंसी को लेकर बीजेपी की तरफ से लगाए जा रहे आरोपों पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेंस की।

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आपातकाल के 50 साल- मोदी सहित पूरी कैबिनेट ने रखा मौन :PM ने लिखा- कांग्रेस ने लोकतंत्र को किया कैद, खड़गे का जवाब- ये झूठ छिपाने का नाटक

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट बैठक में आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर एक प्रस्ताव पास किया गया। इसके बाद आपातकाल के पीड़ितों को श्रद्धांजलि के रूप में दो मिनट का मौन रखा गया।

कैबिनेट बैठक में तीन बड़े फैसले लिए गए। पहला- पुणे मेट्रो विस्तार के लिए 3626 करोड़ रुपये पारित। दूसरा- झरिया (झारखंड) अंडरग्राउंड फायर के लिए 5940 करोड़ रुपये का संशोधित मास्टर प्लान मंजूर। तीसरा- आगरा में 111 करोड़ रुपये की लागत से अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र स्थापित किया जाएगा।

इससे पहले बुधवार सुबह पीएम मोदी ने आपातकाल को लेकर सोशल मीडिया X पर लिखा कि इस दिन कांग्रेस ने लोकतंत्र को कैद कर लिया था। प्रेस की स्वतंत्रता को खत्म कर दी थी। इस पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जवाब दिया कि, ये लोग अपनी गलती छिपाने के लिए यह सब नाटक करते हैं।

दरअसल 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की थी। यह 21 मार्च 1977 यानी 21 महीने तक लागू रहा था। भाजपा इस दिन को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाती है।

इमरजेंसी को लेकर मोदी ने लिखा, यह भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक है। भारत के लोग इस दिन को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाते हैं।

भारत के लोकतांत्रिक ढांचे की रक्षा करना और उन आदर्शों को बनाए रखना, जिनके लिए हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना जीवन समर्पित कर दिया। यह हमारा कर्तव्य है।

यह उनका सामूहिक संघर्ष ही था, जिसके चलते तत्कालीन कांग्रेस सरकार को लोकतंत्र बहाल करना पड़ा और नए चुनाव कराने पड़े, जिसमें वे बुरी तरह हार गए।

हम आपातकाल के खिलाफ लड़ाई में डटे रहने वाले हर व्यक्ति को सलाम करते हैं। पूरे भारत से अलग-अलग विचारधाराओं के लोग आए, उन्होंने एक उद्देश्य से एक-दूसरे के साथ मिलकर काम किया।

PM ने अपनी पोस्ट में ‘द इमरजेंसी डायरीज’ नाम की बुक का भी जिक्र किया। पीएम ने लिखा, जब आपातकाल लगाया गया था, तब मैं RSS का युवा प्रचारक था। आपातकाल विरोधी आंदोलन मेरे लिए सीखने का एक अनुभव था।

इसने हमारे लोकतांत्रिक ढांचे को बचाए रखने की अहमियत को दिखाया। साथ ही, मुझे राजनीतिक स्पेक्ट्रम के सभी लोगों से बहुत कुछ सीखने को मिला।

मुझे खुशी है कि ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन ने उन अनुभवों में से कुछ को एक किताब के रूप में संकलित किया है, जिसकी प्रस्तावना एचडी देवेगौड़ा ने लिखी है, जो खुद आपातकाल विरोधी आंदोलन के एक दिग्गज थे।

उधर इमरजेंसी को लेकर बीजेपी की तरफ से लगाए जा रहे आरोपों पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेंस की। उन्होंने कहा, जिस बात को 50 साल हो गए, ये लोग उसे बार-बार दोहरा रहे हैं। जिनका देश की आजादी के आंदोलन में कोई योगदान नहीं, जिनका संविधान निर्माण में कोई योगदान नहीं रहा। वे हमेशा संविधान के खिलाफ बात करते हैं।

अंबेडकर, नेहरू और संविधान सभा ने जो संविधान तैयार किया उस संविधान को भी उन्होंने रामलीला मैदान में जलाया। उन्होंने अंबेडकर, नेहरू गांधी की फोटो जलाई थी। उनका कहना था कि जो संविधान बना है उसमें हमारी पारंपरिक संस्कृति का अंश नहीं है। चाहे वो मनुस्मृति के तत्व हों, वे इसमें नहीं थे इसलिए वे संविधान को नहीं मानते।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, “आज से 50 साल पहले कांग्रेस की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा की थी, जो कोई राजनीतिक घटना नहीं बल्कि लोकतंत्र पर सीधा हमला था। पचास साल बाद भी कांग्रेस उसी मानसिकता के साथ जी रही है। उसके इरादे आज भी वही हैं जो 1975 में थे।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, यह देश की आत्मा को कुचलने का सीधा प्रयास था। आपातकाल एक परिवार की तरफ से रचा गया षड्यंत्र था जो सत्ता के नशे में था और यह कांग्रेस की अत्याचारी और क्रूर मानसिकता का भी प्रमाण था।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लिखा, देश में आपातकाल, कानूनों के हथियारीकरण, न्यायिक स्वतंत्रता के हनन और नियमों की अनदेखी करके लगाया गया था। कांग्रेस में जो लोग हाथ में संविधान की कॉपी लेकर घूमते हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि 50 साल भी भारत उस अत्याचार को याद करता है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि भारत का लोकतंत्र इसलिए बचा है क्योंकि लोगों ने उस वक्त आपातकाल का विरोध किया। संविधान, लोकतंत्र और कई संस्थाओं को रौंदने वाली घटना ऐसी है, जिसे कभी नहीं भूलना चाहिए।

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